शिमला : शिमला के संजौली में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ और ब्लैकमेल के मामले को लेकर शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। आरोप है कि उत्तर प्रदेश निवासी 2-3 लड़कों ने पहले नाबालिग का वीडियो बनाया और बाद में उसे ब्लैकमेल करने लगे। पीड़िता का यह भी आरोप है कि लड़कों ने उसे अपनी दुकान पर बुलाकर गलत तरीके से छूने का प्रयास भी किया। पीड़िता ने इस मामले में न्यू शिमला स्थित महिला थाना में एफआईआर करवा दी है। हालांकि, परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के 24 घंटे बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई। इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों और देवभूमि संघर्ष समिति के सदस्यों में नाराजगी बढ़ गई। मामले पर हिन्दू सगंठन के कार्यकर्ताओं ने संजौली चौक पर प्रदर्शन किया। शनिवार को बड़ी संख्या में समिति के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग संजौली में एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए सड़क पर धरना देकर यातायात भी बाधित किया तथा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नाबालिग से जुड़े गंभीर मामलों में पुलिस को तत्काल और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं पुलिस दवारा जानकारी अनुसार बताया गया है कि पिछले कल महिला थाना शिमला में एक 16 वर्षीय बालिका के पिता द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक व्यक्ति ने बालिका को अपने दुकान में बुलाकर उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि उक्त व्यक्ति ने लड़की को किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत करते हुए एक वीडियो दिखाकर उस पर दबाव बनाने का प्रयास किया।
शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता के बयान के अनुसार पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की धारा 8 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है तथा कानून द्वारा निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का विधिवत पालन करके मामले के सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों का निष्पक्ष एवं गहनता से अन्वेषण किया जा रहा है। बालिका की सुरक्षा, गरिमा एवं निजता पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस एक संवेदनशील एवं पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले की जांच कर रही है।
इस बीच पुलिस के संज्ञान में यह भी आया है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा अपुष्ट एवं भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करके दो अन्य लोगों के विरुद्ध आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट कर जुलूस निकाला गया। जिनके नाम न तो शिकायत में हैं और न ही पीड़िता के बयान में।जिनकी इस प्रकरण में भूमिका की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।परन्तु पुलिस जांच के बीच में ही कुछ लोगों द्वारा कानून को अपने हाथ में लेने के प्रयास किया गया है। किसी भी प्रकार की धमकी, मारपीट, भीड़तंत्र, अवैध गतिविधि अथवा जांच में हस्तक्षेप कानून के विरुद्ध है जिसमें भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा है कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष, पेशेवर एवं त्वरित जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर जो भी व्यक्ति किसी अपराध में संलिप्त पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।