शिमला ग्रीष्मोत्सव में होगा पहली अंतर-विद्यालय वाद-विवेचन प्रतियोगिता “श्यामला मंथन” का आयोजन

विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, तार्किक चिंतन और वक्तृत्व कौशल को मिलेगा नया मंच – उपायुक्त अनुपम कश्यप

शिमला: अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के तहत जिला प्रशासन शिमला द्वारा पहली बार एक महत्वाकांक्षी साहित्यिक एवं बौद्धिक पहल “श्यामला मंथन” का आयोजन किया जा रहा है। यह अंतर-विद्यालय वाद-विवेचन (डेक्लामेशन) प्रतियोगिता विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति, तार्किक क्षमता, रचनात्मक सोच और सार्वजनिक वक्तृत्व कला का प्रदर्शन करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करेगी। प्रतियोगिता का आयोजन शिमला जिला के अध्ययनरत कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए किया जा रहा है।

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना भी है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पहली बार “श्यामला मंथन” जैसी अभिनव प्रतियोगिता शुरू की गई है, जो विद्यार्थियों को विचारों की अभिव्यक्ति, संवाद की संस्कृति और स्वस्थ बौद्धिक प्रतिस्पर्धा का अवसर प्रदान करेगी।

उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में युवा पीढ़ी का अधिकांश समय सोशल मीडिया और आभासी दुनिया में व्यतीत होता है। ऐसे समय में आवश्यक है कि विद्यार्थियों को ऐसे मंच उपलब्ध कराए जाएं, जहां वह अपने विचारों को सार्थक दिशा दे सकें, सामाजिक विषयों पर चिंतन कर सकें तथा अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास कर सकें। “श्यामला मंथन” इसी सोच का परिणाम है, जो युवाओं को सकारात्मक संवाद, रचनात्मक अभिव्यक्ति और जिम्मेदार नागरिकता की ओर प्रेरित करेगा।

उपायुक्त ने कहा कि वाद-विवेचन की परंपरा भारतीय समाज की एक समृद्ध बौद्धिक विरासत रही है। विचारों के आदान-प्रदान और स्वस्थ बहस के माध्यम से ही समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन संभव होते हैं। इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, आत्मविश्वास, प्रभावी संप्रेषण, नेतृत्व क्षमता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह पहल युवाओं को नशे, असामाजिक गतिविधियों और अन्य नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने में भी सहायक सिद्ध होगी।

उपायुक्त ने कहा कि इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल वक्तृत्व कला का प्रदर्शन करने का अवसर ही नहीं मिलेगा, बल्कि वह वर्तमान समय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर शोध, अध्ययन और गहन चिंतन भी कर सकेंगे। इससे उनमें तार्किक सोच, विश्लेषण क्षमता और जागरूक नागरिकता की भावना विकसित होगी।

अनुपम कश्यप ने जिला के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों से इस अनूठी पहल में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि “श्यामला मंथन” केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं को विचारशील, जागरूक, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक सशक्त अभियान है। यह मंच विद्यार्थियों को अपनी आवाज बुलंद करने, समसामयिक विषयों पर सार्थक संवाद स्थापित करने तथा समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझने का अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिमला के विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और “Speak for Shimla” के संदेश को सार्थक रूप से आगे बढ़ाएंगे। जिला प्रशासन इस आयोजन को भविष्य में शिमला की एक प्रतिष्ठित बौद्धिक और साहित्यिक परंपरा के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

समसामयिक विषयों पर होगा मंथन
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि प्रतियोगिता के प्रथम चरण के लिए दो अत्यंत समसामयिक और विचारोत्तेजक विषय निर्धारित किए गए हैं। इन विषयों का चयन वर्तमान समय में युवाओं के जीवन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण सामाजिक और तकनीकी परिवर्तनों को ध्यान में रखकर किया गया है।

1. पहला विषय “Will Generative AI Create Pioneers or Bystanders?” (क्या जनरेटिव एआई (AI) हमें मार्गदर्शक बनाएगा या सिर्फ मूकदर्शक?) रखा गया है। इस विषय के माध्यम से विद्यार्थी अपने विचार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, नवाचार, रचनात्मकता, रोजगार, शिक्षा और भविष्य की संभावनाओं पर रखेंगे। यह विषय युवाओं को यह सोचने का अवसर देगा कि क्या एआई मानव क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा या फिर मनुष्य को तकनीक पर अत्यधिक निर्भर बनाकर केवल दर्शक की भूमिका तक सीमित कर देगा।
2. दूसरा विषय “The 15-Second Attention Economy: How the Doomscroll is Rewriting our Brain” (15-सेकंड की एकाग्रता: रील और शॉर्ट्स की संस्कृति में सिमटता हमारा मस्तिष्क) निर्धारित किया गया है। यह विषय सोशल मीडिया, रील्स और शॉर्ट वीडियो की बढ़ती संस्कृति के कारण युवाओं की एकाग्रता, सोचने की क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार में आ रहे परिवर्तनों पर केंद्रित है। इसके माध्यम से विद्यार्थी यह विश्लेषण करेंगे कि डिजिटल माध्यमों की तीव्र गति किस प्रकार हमारी सीखने की प्रक्रिया, निर्णय क्षमता और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति को प्रभावित कर रही है।

दो भाषाओं में होगी प्रतियोगिता
प्रतियोगिता दो श्रेणियों—हिंदी वाद-विवेचन एवं अंग्रेजी वाद-विवेचन में आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। अधिकाधिक विद्यालयों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतियोगिता को 04 जोन में आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में नामित नोडल विद्यालयों में प्रारंभिक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी।
प्रत्येक जोन से हिंदी और अंग्रेजी श्रेणी में तीन-तीन श्रेष्ठ वक्ताओं का चयन किया जाएगा। इस प्रकार चारों जोन से कुल 24 प्रतिभागी अंतिम चरण के लिए चयनित होंगे। अंतिम प्रतियोगिता का आयोजन ऐतिहासिक गेयटी थिएटर, द रिज, शिमला में किया जाएगा।
प्रतियोगिता में प्रत्येक प्रतिभागी को 4 से 5 मिनट का समय प्रदान किया जाएगा। प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु की गुणवत्ता, मौलिकता, स्पष्ट उच्चारण, स्वर-संचालन, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल, मंच प्रस्तुति तथा समग्र प्रभाव के आधार पर किया जाएगा।

विजेताओं को मिलेगा इनाम
प्रतियोगिता के विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 50 हजार रुपये की नकद राशि, प्रशस्ति प्रमाण-पत्र तथा प्रतिष्ठित “शब्द शिल्पी” रनिंग ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। द्वितीय पुरस्कार 30 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 20 हजार रुपये का होगा। इसके अतिरिक्त दोनों श्रेणियों में दो-दो सांत्वना पुरस्कार तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

10 जून को होगा फाइनल
जोनल प्रतियोगिताएं 2 जून 2026 को आयोजित होंगी। अंतिम चरण के विषयों की घोषणा 5 जून 2026 को होगी तथा फाइनल प्रतियोगिता 10 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। प्रत्येक विद्यालय से हिंदी एवं अंग्रेजी श्रेणी के लिए एक-एक प्रतिभागी नामांकित किया जा सकता है। नामांकन भेजने की अंतिम तिथि 24 मई 2026 निर्धारित की गई थी।

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