सेवा विस्तार, पदोन्नति में देरी और वेतन स्थगन पर सैमडकॉट ने दी कड़ी चेतावनी
सेवा विस्तार, पदोन्नति में देरी और वेतन स्थगन पर सैमडकॉट ने दी कड़ी चेतावनी
शिमला — आईजीएमसी (IGMC) शिमला के कंसल्टेंट डॉक्टरों की शीर्ष संस्था, सीनियर एकेडमिक मेडिकल डॉक्टर्स एसोसिएशन (सैमडकॉट), ने आज राज्य के मेडिकल कॉलेजों में उत्पन्न हो रहे गंभीर संकट पर चर्चा के लिए ‘जनरल हाउस’ की बैठक आयोजित की। इस सभा में प्रिंसिपलों और चिकित्सा शिक्षा निदेशक (DME) के पदों पर चहेते अधिकारियों को दिए गए अनुचित सेवा विस्तार, नियमित पदोन्नति में बाधा और मासिक वेतन के प्रस्तावित स्थगन को लेकर संकाय सदस्यों में भारी रोष देखा गया।
जनरल हाउस ने प्रिंसिपलों और चिकित्सा शिक्षा निदेशक के महत्वपूर्ण पदों को भरने के लिए “चुनिंदा” सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। सदस्यों ने रेखांकित किया कि ये अस्थायी व्यवस्थाएं 13 दिसंबर, 2023 की राजपत्रित अधिसूचना (Gazetted Notification) का स्पष्ट उल्लंघन हैं, जो पुनर्नियुक्त कर्मचारियों को आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) की शक्तियां देने पर रोक लगाती है।
एसोसिएशन ने कहा, “उच्च पदस्थ और पात्र संकाय सदस्यों को पदोन्नत करने में राज्य की झिझक न केवल एक प्रशासनिक चूक है, बल्कि नीति का उल्लंघन भी है। जहाँ पात्र डॉक्टर पदोन्नति की प्रतीक्षा में ठिठके हुए हैं, वहीं पुनर्नियुक्त अधिकारी पेंशन और पूर्ण वेतन दोनों ले रहे हैं, जिससे आर्थिक तंगी से जूझ रहे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।” ’क्वाइट क्विटिंग’ और शैक्षणिक पतन का खतरा
सभा में उल्लेख किया गया कि अगस्त 2022 के बाद से राज्य में प्रिंसिपल के पद पर कोई नियमित पदोन्नति नहीं हुई है। करियर की प्रगति पर इस “पूर्ण विराम” के कारण निम्नलिखित स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं:
घटता मनोबल: वरिष्ठ संकाय सदस्य स्वयं को व्यवस्था द्वारा उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
प्रतिभा पलायन का जोखिम: सदन ने चेतावनी दी कि पदोन्नति के अधिकारों का हनन “क्वाइट क्विटिंग” (कार्य के प्रति उदासीनता) की लहर पैदा कर रहा है।
शैक्षणिक संकट: वरिष्ठ विशेषज्ञों का पलायन राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चल रहे और प्रस्तावित स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों की मान्यता को खतरे में डाल देगा, जिससे उच्च चिकित्सा शिक्षा पूरी तरह ठप हो सकती है। वित्तीय कठिनाई और वेतन स्थगन
सैमडकॉट ने ग्रुप-ए और ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन में 20-30% की कटौती/स्थगन के सरकारी प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।
एसोसिएशन ने जोर देकर कहा, “सरकारी कर्मचारी का वेतन एक सुरक्षित अधिकार है, कोई वैकल्पिक खर्च नहीं।” पिछले दस वर्षों से लंबित संशोधित वेतनमान के एरियर और 15% लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बीच, यह स्थगन लगभग 30,000 कर्मचारियों को आर्थिक रूप से पंगु बना देगा। सदस्यों ने कहा कि जहाँ राज्य की बचत केवल ₹10 करोड़ प्रति माह है, वहीं होम लोन और दैनिक खर्चों से बंधे परिवारों पर इसका प्रभाव “अत्यंत पीड़ादायक” होगा। कार्रवाई की मांग
जनरल हाउस ने सर्वसम्मति से वेतन स्थगन नीति को तत्काल वापस लेने और अधिसूचित वरिष्ठता सूची के अनुसार नियमित संकाय की पारदर्शी, योग्यता-आधारित पदोन्नति बहाल करने की मांग की है।
सैमडकॉट ने चेतावनी दी है कि यदि इन शिकायतों का निवारण नहीं किया गया, तो हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों की कार्य संस्कृति अपूरणीय रूप से क्षतिग्रस्त हो जाएगी और जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से समझौता होगा।