शिमला : राजधानी शिमला में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से शहर में पिछले छह दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और इसी बीच नगर निगम प्रशासन ने हड़ताल पर गए लगभग 40 सफाई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद सीटू और अन्य श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ दमन जारी रहा तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नगर निगम प्रशासन ने यह कार्रवाई ऐसे समय में की है, जब जिला प्रशासन की ओर से सफाई व्यवस्था को जरूरी सेवा मानते हुए एस्मा लागू किया गया है। इसके बावजूद सफाई कर्मचारी काम पर नहीं लौटे। शिमला में छह दिनों से लगातार सफाई कर्मचारी काम पर नहीं लौटे थे, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर निगम कमिश्नर ने यह सख्त कदम उठाया है, क्योंकि उपायुक्त शिमला द्वारा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) पहले ही लागू किया जा चुका है। इस अधिनियम के तहत कर्मचारियों का हड़ताल पर जाना गैरकानूनी माना जाता है।
वहीं कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रशासन से बातचीत करते रहे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। सैहब सोसाइटी से जुड़े करीब 800 सफाई कर्मचारी 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन बढ़ोतरी बहाल करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि साल की शुरुआत में उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई थी। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच 12 हजार रुपये महीने में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
हड़ताल का असर अब पूरे शहर में साफ दिखाई देने लगा है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। पिछले छह दिनों से घर-घर जाकर कूड़ा नहीं उठाया जा सका है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ शिमला पहुंच रहे पर्यटक भी हालात से परेशान हैं।