भाजपा नेता अक्सर हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास करते हैं – CM सुक्खू

शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अनुराग ठाकुर  केंद्रीय राज्य वित्त मंत्री रह चुके हैं, फिर भी उन्हें यह नहीं मालूम कि किसी बिल के एक्ट बनने के बाद राज्य सरकार का अधिकार होता है कि कर लगाना है या नहीं। बतौर सांसद उनका काम सिर्फ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी  और प्रियंका गांधी  के बारे में अनाप शनाप बयान देना रह गया है, ताकि केंद्र सरकार में कोई महत्वपूर्ण भूमिका मिल सके। इसलिए वह इस प्रकार की बयानबाजी कर भाजपा नेताओं का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उन्हें इस पर बोलने से पहले अध्ययन करना चाहिए। जबकि, अभी तक हिमाचल प्रदेश में डीज़ल और पेट्रोल की कीमतें भाजपा शासित हरियाणा और आम आदमी पार्टी शासित पंजाब से कम हैं। यह हमारे ऊपर है कि हम पेट्रो पदार्थों पर वैट लगाएँ या नहीं। अगर वैट लगता है, तो उसका लाभ निश्चित रूप से विधवा बहनों और अनाथ बच्चों को मिले उन्होंने कहा कि

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा नेता अक्सर हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास करते हैं। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर  की प्रवृत्ति भी इससे अलग नहीं हैं। एंट्री टैक्स को लेकर मचाया जा रहा अनावश्यक शोर तथ्यपरक नहीं है। मैंने पहले भी स्पष्ट किया है कि इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से विचार किया जाएगा।

इस मुद्दे पर मेरी पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष तथा पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से भी चर्चा हुई है।

यह टैक्स कोई नया नहीं है, यह पिछले लगभग 40 वर्षों से लागू है। इसे किसी विशेष राज्य को ध्यान में रखकर नहीं लगाया गया है। यदि इसके कारण मूल्य वृद्धि का प्रभाव पड़ा है, तो राहत देने के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर जी प्रधानमंत्री  से मिलकर लौटे हैं। उन्हें मोदी जी से RDG की बहाली के विषय पर भी बात करनी चाहिए थी, लेकिन इस संबंध में उन्होंने कोई बयान नहीं दिया। इसके बजाय वह विधानसभा के बाहर यह कह रहे हैं कि सरकार ने सेस लगा दिया है, जबकि अभी यह बिल केवल विधानसभा में पारित हुआ है।

बिल के कानून बनने के लिए राज्यपाल जी की स्वीकृति आवश्यक होती है, उसके बाद नोटिफिकेशन जारी होता है।

सीएम सुक्खू बोले नेशनल मीडिया में यह भी गलत तरीके से चलाया जा रहा है कि डीजल और पेट्रोल के दाम पाँच-पाँच रुपये बढ़ा दिए गए हैं, जबकि अभी इसका कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। इस बिल के तहत अधिकतम पाँच रुपये तक सेस लगाने का अधिकार है, लेकिन इसे लागू करना या न करना सरकार पर निर्भर करता है।

ऐसे में बिना नोटिफिकेशन के ही नेशनल मीडिया में भ्रामक खबरें चलाई जा रही हैं?

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