लोकसभा में गूंजा हिमाचल के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का मुद्दा – हजारों स्कूल अब भी संसाधनों से वंचित : कश्यप
लोकसभा में गूंजा हिमाचल के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का मुद्दा – हजारों स्कूल अब भी संसाधनों से वंचित : कश्यप
केंद्र से हजारों करोड़ का प्रावधान, फिर भी प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अधूरा – जवाबदेही तय हो
शिमला: भाजपा लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की स्थिति को लेकर गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया की दिशा में केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन प्रदेश में जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश में कुल 13,978 ग्रामीण और 469 शहरी, कुल मिलाकर 14,397 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से:
* केवल 8,599 ग्रामीण और 311 शहरी (कुल 8,910 स्कूल) में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है
* 13,783 ग्रामीण और 468 शहरी (कुल 14,251 स्कूल) में डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं
* लेकिन स्मार्ट क्लास की सुविधा मात्र 10,570 ग्रामीण और 425 शहरी (कुल 10,995 स्कूल) तक ही सीमित है
उन्होंने कहा कि यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बड़ी संख्या में स्कूल अभी भी पूर्ण डिजिटल सुविधाओं से वंचित हैं।
सुरेश कश्यप ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्षों में भारी बजट उपलब्ध कराया गया है:
* 2021-22 में ₹10,165.60 करोड़ (राज्य) और ₹9,149.04 करोड़ (केंद्र)
* 2022-23 में ₹16,351.33 करोड़ (राज्य) और ₹14,716.20 करोड़ (केंद्र)
* 2023-24 में ₹14,656.54 करोड़ (राज्य) और ₹13,108.99 करोड़ (केंद्र)
* 2024-25 में ₹3,722.54 करोड़ (राज्य) और ₹3,350.28 करोड़ (केंद्र)
* 2025-26 (BE) में ₹7,920.86 करोड़ (राज्य) और ₹7,128.77 करोड़ (केंद्र)
उन्होंने कहा कि इतने बड़े बजट के बावजूद यदि स्कूलों में इंटरनेट, स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधन पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो यह प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सुरेश कश्यप ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत देशभर में 3,71,749 स्कूलों को इंटरनेट कनेक्टिविटी दी गई है और 89.92 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल रहा है, लेकिन हिमाचल में इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। उन्होंने प्रदेश सरकार से सवाल किया:
* जब डिजिटल उपकरण उपलब्ध हैं तो सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लास क्यों नहीं?
* इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी हजारों स्कूलों तक क्यों नहीं पहुंची?
* केंद्र से मिले बजट का पूरा उपयोग क्यों नहीं हुआ?
अंत में उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज की आवश्यकता है और हिमाचल के बच्चों को इससे वंचित रखना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे विषय की समीक्षा कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और हर स्कूल तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचाई जाएं।
“केंद्र सरकार संसाधन दे रही है, लेकिन प्रदेश सरकार की लापरवाही के कारण हिमाचल के बच्चों को डिजिटल शिक्षा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है – यह स्थिति तुरंत सुधारी जानी चाहिए।”