हिमाचल: CM सुक्खू ने विधानसभा में प्रस्तुत किया आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26

हिमाचल : प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया। यह सर्वेक्षण अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किया गया है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 राज्य की आर्थिक स्थिति का वास्तविक एवं साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत करता है, जिसमें राजकोषीय दबाव, जलवायु संवेदनशीलता तथा बदलती विकास प्राथमिकताओं के संदर्भ में प्रगति एवं उभरती चुनौतियों को रेखांकित किया गया है। यह सर्वेक्षण क्षेत्रीय प्रवृत्तियों, नीतिगत प्रयासों तथा सतत एवं समावेशी विकास के लिए आगे की दिशा का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैंः

वर्ष 2025-26 में हिमाचल की आर्थिक स्थिति

* हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर सशक्त और अनुकूलनशील विकास गति के साथ आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) प्रचलित मूल्यों पर लगभग ₹2.54 लाख करोड़ आंका गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10.1 प्रतिशत की संतोषजनक वृद्धि को दर्शाता है। स्थिर मूल्यों पर राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग 8.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और जलवायु चुनौतियों के बावजूद विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। यह प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और अनुकूलन क्षमता को रेखांकित करता है।

अग्रिम अनुमान के अनुसार, वितीय वर्ष 2025-26 के लिए स्थिर (2011-12) भावों या वास्तविक राज्य सकल घरेलू उत्पाद ₹1,56,681 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹1,44,656 करोड़ था और यह वित्त वर्ष 2024-25 (प्रथम संशोधित अनुमान) के 6.4 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2025-26 के लिए 8.3 प्रतिशत वृद्धि दर प्रदर्शित करता है।

* वित वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में प्राथमिक क्षेत्र से सकल मूल्य वर्धित में स्थिर भावों पर 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान के दौरान प्राथमिक क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धित स्थिर भावों पर 2024-25 प्रथम संशोधित अनुमान में ₹17,362 करोड़ के मुकाबले ₹18,824 करोड़ हो गया।* वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अग्रिम अनुमान के अनुसार, स्थिर (2011-12) भावों पर द्वितीयक क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धित ₹66,324 करोड़ अनुमानित है जोकि वित्त वर्ष 2024-25 प्रथम संशोधित अनुमान के लिए ₹61,561 करोड था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज होने की आशा है।

* राज्य में सेवा क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धित में सबसे अधिक योगदान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान के लिए सेवा क्षेत्र के लिए स्थिर (2011-12) भावों पर ₹62,581 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 प्रथम संशोधित अनुमान में यह ₹57,643 करोड़ था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है।

प्रति व्यक्ति आय (पी.सी.आई.)

* सेवा क्षेत्र राज्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख प्रेरक बना हुआ है, जिसे पर्यटन, व्यापार, परिवहन तथा वित्तीय सेवाओं के निरंतर विस्तार से बल मिल रहा है, जबकि उद्योग तथा जलविद्युत राज्य के विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं। इसके साथ ही कृषि एवं सहायक क्षेत्र बड़ी आबादी की आजीविका को सहारा देते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला बने हुए हैं और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। राज्य के लोगों की आर्थिक समृद्धि को दर्शाते हुए वर्ष 2025-26 में हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय ₹2,83,626 आंकी गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है तथा राष्ट्रीय औसत से ₹64,051 अधिक है।

* राज्य के प्रति व्यक्ति आय में 2011-12 में ₹87,721 से बढ़कर 2025-26 में ₹2,83,626 हो गई, जो 2011-12 की तुलना में 8.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज करती है।

क्षेत्रवार योगदान

* किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को तीन प्रमुख क्षेत्रों-प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक द्वारा किए गए आर्थिक योगदान के संदर्भ में मापा जाता है। राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धित में तृतीयक क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान रहा है, इसके बाद द्वितीयक और प्राथमिक क्षेत्रों का स्थान है।

* वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल राज्य मूल्य वर्धित के अग्रिम अनुमान के आधार पर, तृतीयक क्षेत्र का प्रचलित मूल्यों पर राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 46.3 प्रतिशत हिस्सा है, इसके बाद द्वितीयक क्षेत्र का 39.4 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र का 14.3 प्रतिशत है।कृषि एवं संबंधित क्षेत्र

* राज्य की अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र के योगदान में वर्षों से निरंतर वृद्धि हुई है। वर्तमान कीमतों पर सकल राज्य मूल्य वर्धित में कृषि और संबद्ध क्षेत्र का योगदान वित्त वर्ष 2021-22 में ₹22,428 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹32,415 करोड़ हो गया है।

* वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच वर्तमान कीमतों पर फसलों के सकल राज्य मूल्य वर्धित में उल्लेखनीय सुधार हुआ है (वित्त वर्ष 2021-22 में ₹13,722 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹18,515 करोड़ हो गया है)। इसी अवधि में वर्तमान कीमतों पर सकल राज्य मूल्य वर्धित में फसल क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत बढ़ा है।

* अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर कृषि और संबद्ध क्षेत्र के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 8.30 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि दर 2.70 प्रतिशत रही थी।

* वित्त वर्ष 2025-26 में पशुधन उपक्षेत्र सकल राज्य मूल्य वर्धित का 2.40 प्रतिशत और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के सकल राज्य मूल्य वर्धित का 17.45 प्रतिशत है।

औद्योगिक क्षेत्र के प्रवृत्तियाँ

* राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन में उद्योग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्तमान कीमतों पर उद्योग क्षेत्र (खनन और उत्खनन सहित) का अनुमानित मूल्य ₹94,381 करोड़ है।

* वित्त वर्ष 2025-26 में सकल राज्य मूल्य वर्धित में उद्योग क्षेत्र (खनन और उत्खनन सहित) का वर्तमान मूल्य पर योगदान 39.96 प्रतिशत है, जिसमें से 25.32 प्रतिशत विनिर्माण क्षेत्र से, 8.42 प्रतिशत निर्माण क्षेत्र से और 6.22 प्रतिशत बिजली, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं से आता है।

* अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उद्योग क्षेत्र के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 7.77 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है और राष्ट्रीय स्तर पर, इसी अवधि के दौरान उद्योग क्षेत्र के सकल वार्षिक वृद्धि मूल्य में स्थिर रूप से 6.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

* वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, विनिर्माण क्षेत्र में 5.74 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। 2015-16 से 2025-26 के बीच, उद्योग क्षेत्र के उप-क्षेत्रों में विनिर्माण क्षेत्र ने 5.19 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर का अनुभव किया।विकास महत्वपूर्ण है और राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी आवश्यक है।

* संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों की आय बढ़ाने के लिए निर्माण उप-क्षेत्र का वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उद्योग क्षेत्र में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर सबसे अधिक 12.56 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

पर्यटन

* वर्ष 2024-25 (प्रथम संशोधन) के अनुसार आतिथ्य सत्कार, परिवहन, हस्तशिल्प और संबंधित उद्योगों में पर्यटन, होटल और रेस्तरां क्षेत्र का हिमाचल प्रदेश के सकल राज्य मूल्य वर्धित में 7.77 प्रतिशत का योगदान देता है।

* महामारी के बाद हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, घरेलू पर्यटकों की संख्या 2020 में 32.13 लाख से बढ़कर 2025 में 311.47 लाख हो गई है, जो महामारी से पहले के स्तर के करीब है। राज्य के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह वृद्धि दीर्घकालिक रूप से सतत बनी रहे।

ऊर्जा

* 143 परियोजनाओं से राज्य सरकार की पात्रता कुल 1,574.06 मेगावाट बिक्री योग्य विद्युत का है। दिसंबर 2025 तक ₹1,668 करोड़ का राजस्व अर्जित किया गया है, तथा मार्च 2026 तक अतिरिक्त ₹249 करोड़ प्राप्त होने की संभावना है।

* हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड वर्तमान में 28 जलविद्युत परियोजनाओं (589.35 मेगावाट) का संचालन कर रहा है। इन परियोजनाओं से दिसंबर 2025 तक 1,973.64 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन दर्ज किया गया है, तथा मार्च 2026 तक यह उत्पादन 2,200 एम.यू से अधिक होने का अनुमान है। इससे राज्यभर में विश्वसनीय एवं सतत विद्युत वितरण सुनिश्चित होगा।

मुद्रास्फीति की वर्तमान प्रवृत्तियाँ

* सितंबर से आगे, सभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खंडों में मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शहरी मुद्रास्फीति में तीव्र नरमी आई और यह अक्टूबर से नवंबर के दौरान लगभग शून्य स्तर के निकट पहुँच गई, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक – संयुक्त में निरंतर गिरावट दर्ज की गई और यह दिसंबर तक घटकर लगभग 1 प्रतिशत रह गई।सामाजिक सेवाएं

* स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, 115 सिविल अस्पतालों, 110 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 586 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा 24 ई.एस.आई. सिविल डिस्पेंसरी सहित एक सुदृढ़ स्वास्थ्य अवसंरचना नेटवर्क के माध्यम से उपचारात्मक, निवारक एवं पुनर्वास सेवाओं का व्यवस्थित रूप से प्रदान करता है।

* हिमाचल प्रदेश के लोगों को राज्य के भीतर और बाहर यात्री परिवहन सेवाएं हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा 3,079 बसों, 110 इलेक्ट्रिक बसों, 38 टैक्सियों, 50 इलेक्ट्रिक टैक्सियों और 12 टेम्पो ट्रैवलर के बेड़े के साथ प्रदान की जा रही हैं।

सरकार अवसंरचना में निवेश, सतत पर्यटन को प्रोत्साहन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर सृजित करने के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास के लाभ राज्य के प्रत्येक नागरिक तक पहुँच सकें।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में प्रस्तुत प्रमुख पहलें

हिमाचल प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कई संरचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक सुधार प्रस्तुत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य सर्वेक्षण को साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण एवं विकास नियोजन के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में सुदृढ़ करना है। संशोधित रूपरेखा से स्पष्टता, विश्लेषणात्मक गहराई तथा सुगमता में वृद्धि हुई है, जिससे नीति-निर्माताओं, योजना निर्माताओं, शोधकर्ताओं एवं अन्य हितधारकों को आर्थिक प्रवृत्तियों एवं क्षेत्रीय प्रदर्शन को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलती है।

1. अध्याय-वार कार्यकारी सारांश

2. मुख्य उपलब्धियों पर समर्पित अनुभाग

3. प्रमुख मुद्दों एवं चुनौतियों की पहचान

4. परिणाम-उन्मुख विश्लेषणात्मक ढांचा

5. उभरते विकास क्षेत्रों पर विस्तारित विशेष ध्यान

6. सुदृढ़ आँकड़ा एवं साक्ष्य आधार

7. प्रस्तुतीकरण एवं आँकड़ा दृश्यांकन में सुधार

8. नीति एवं योजना प्राथमिकताओं के साथ सामंजस्य

9. भावी दिशा

उपरोक्त सभी पहलों के माध्यम से आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को अधिक संरचित, विश्लेषणात्मक एवं नीति-उन्मुख दस्तावेज बनाया गया है, जो हिमाचल प्रदेश में सूचना आधारित निर्णय लेने एवं विकास नियोजन को सशक्त बनाता है।

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