हिमाचल: ट्रांसपोर्ट विभाग में ऑटोमेटिक अप्रूवल प्रणाली लागू ..

हिमाचल : प्रदेश में परिवहन सेवाओं को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हिमाचल प्रदेश ट्रांसपोर्ट विभाग ने अधिकांश सेवाओं को पूरी तरह ऑटोमेटिक अप्रूवल प्रणाली से जोड़ दिया है। विभाग की नई व्यवस्था से लोगों को तेज और सरल सेवाएं मिल रही हैं।

शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि विभाग ने इस वर्ष 1 हजार करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है। बेहतर कार्यप्रणाली के लिए भारत सरकार ने भी विभाग को 93 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है। डिप्टी सीएम ने बताया कि गुड्स, टूरिस्ट और नेशनल परमिट अब पूरी तरह ऑटोमैटिक प्रणाली से जारी किए जा रहे हैं, जिसका लाभ 6543 लोग ले चुके हैं। डिजिटल फिटनेस प्रणाली भी लागू की जा चुकी है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं और छह स्थानों पर ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक तैयार हो चुके हैं।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में 2257 पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग की जा चुकी है। विभाग ने 50 वर्ष पुरानी गाड़ियों को विंटेज घोषित करने का निर्णय लिया है और उनके लिए विशेष “VA” (Vintage Agnihotri) नंबर प्लेट जारी की जाएगी। राजस्व के आंकड़ों पर बोलते हुए अग्निहोत्री ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सरकार के तीन वर्षों में 2744 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में समान अवधि में 1564 करोड़ रुपये ही जुटाए गए थे। फैंसी नंबरों की नीलामी से भी 81 करोड़ रुपये की आय हुई, जिसमें HP 97 0001 नंबर 20 लाख रुपये में सबसे महंगा बिका।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के टैक्सी संचालकों की वर्षों पुरानी मांग को प्राथमिकता देते हुए टैक्सी परमिट की अवधि 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करने का मुद्दा दृढ़ता और निरंतरता के साथ केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया। लगातार संवाद और सकारात्मक पहल के परिणामस्वरूप अंततः इस दिशा में सफलता प्राप्त हुई और केंद्र सरकार ने परमिट अवधि 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी।  देवभूमि हिमाचल से उठी यह आवाज केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश के लाखों टैक्सी संचालकों के लिए राहत और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त करने वाली सिद्ध हुई।  उन्होंने कहा कि ट्रक ऑपरेटरों की “नेशनल परमिट” अवधि 12 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने की मांग भी मजबूती के साथ केंद्र सरकार के समक्ष उठायी जाएगी।

 

 

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