सोलन: नेपाली कृषि अधिकारियों के लिए 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
सोलन: नेपाली कृषि अधिकारियों के लिए 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
सोलन: नेपाली कृषि अधिकारियों के लिए आयोजित 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में हुआ। यह कार्यक्रम भारत और नेपाल के विदेश मंत्रालयों की संयुक्त पहल के अंतर्गत संपन्न हुआ। भारतीय विदेश मंत्रालय तथा नेपाल सरकार के संघीय एवं प्रांतीय कृषि मंत्रालयों के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल के अंतर्गत यह दूसरा प्रशिक्षण बैच था, जिसका उद्देश्य लगभग 300 नेपाली कृषि अधिकारियों और किसानों की क्षमता निर्माण करना है।
कार्यक्रम में नेपाल के चार प्रांतों—कर्णाली, लुंबिनी, सुदूरपश्चिम और गंडकी—से आए 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सेब, अखरोट और कीवी जैसे शीतोष्ण फलों की जैविक एवं प्राकृतिक खेती से संबंधित कौशलों का विकास करना था।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि भारत और नेपाल, समान कृषि-जलवायु परिस्थितियों और समृद्ध पारंपरिक ज्ञान का लाभ उठाकर, मिलकर सतत पर्वतीय कृषि का एक आदर्श मॉडल बन सकते हैं। उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम लागत एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में उभर रही है। प्रो. चंदेल ने हिमाचल प्रदेश के प्राकृतिक खेती के अनुभवों को साझा करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इन पद्धतियों को नेपाल की परिस्थितियों के अनुरूप सफलतापूर्वक अपनाया जा सकता है।
प्रतिनिधिमंडल के टीम लीडर एवं नेपाल के कृषि प्रसार अधिकारी प्रेम बहादुर ओली ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा आयोजित इस अत्यंत उपयोगी और व्यवहारिक कार्यक्रम के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, जैविक उत्पादन प्रणालियों और प्राकृतिक खेती से संबंधित प्राप्त अनुभव नेपाल के कृषि अधिकारियों और किसानों, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में, के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। निदेशक विस्तार सुदुरपश्चिम प्रांत टीकेन्द्र कुसमी ने आधुनिक कृषि तकनीकों को सीखने का अवसर प्रदान करने के लिए भारत और नेपाल सरकारों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाएगा, जिसका लाभ अवश्य ही किसानों को मिलेगा।
इससे पूर्व निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंदर देव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए भारत और नेपाल के बीच कृषि क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नेपाल और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में समानता होने के कारण इस कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित तकनीकें अत्यंत प्रासंगिक और आसानी से अपनाई जा सकने योग्य हैं। संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. अनिल हांडा ने कार्यक्रम के दौरान आयोजित गतिविधियों—जैसे क्षेत्र भ्रमण, व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र तथा वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील किसानों के साथ संवाद—का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक नर्सरी एवं प्रवर्धन तकनीकों, प्रूनिंग एवं कैनोपी प्रबंधन, उच्च सघनता बागानों में सिंचाई एवं जल प्रबंधन, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्रों एवं किसानों के खेतों का भ्रमण तथा जैव-नियंत्रण उपायों और प्राकृतिक खेती की तकनीकों के प्रदर्शन भी प्रशिक्षण कार्यक्रम का अभिन्न अंग रहे।