हिमाचल की प्रमुख खूबसूरत झीलें…..

गुडासरू महादेव झील चुराह-यह झील चुराहा घाटी में भूमध्य रेखा से 32°58′ उत्तरी अक्षांश तथा 76°14′ पूर्वी रेखांश के मध्य स्थित है। तीसा से 27 कि.मी. की दूरी पर बैरागढ़ गांव तथा उसके बाद 15 कि.मी. का सफर तय करने पर देवी कोठी गांव पड़ता है। इस गांव में देवी चामुण्डा के दर्शन करने के उपरान्त दूसरे दिन गुडासरू झील पर पहुँचते हैं। यह झील समुद्रतल से लगभग 4280 मीटर की ऊँचाई पर है। इस झील की परिधि लगभग एक कि.मी. अर्थात दो हैक्टेयर है।

मैहलनाग डल झील चुराहा- यह झील चम्बा जिले की चुराहा घाटी के मैहलवारधार पर स्थित है। यह झील नाग देवता के नाम से विख्यात हुई है।

बैसाखी चामुण्डा डल झील, चुराहा– यह झील चम्बा जिले की ऐंथली जोत पर चुराहा घाटी में पड़ती है।

काली का डल झील, चुराहा- यह झील नोसराधार पर चुराहा घाटी में पड़ती है।

चमेरा झील, चम्बा- यह झील रावी नदी पर चमेरा बांध के बनने पर अस्तित्व में आई है। यह कृत्रिम झील समुदतल से 890 मीटर की ऊँचाई पर है।

रिवालसर झील, मण्डी- यह झील बौद्ध, हिन्दू और सिक्ख तीन धर्मों की त्रिवेणी के नाम से विख्यात है। यह झील भूमध्य रेखा से 31°38′ उत्तरी अक्षांश तथा 76°50′ पूर्वी रेखांश के मध्य समुद्रतल से 1360 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं। यहाँ प्रसिद्ध बौद्ध मेला छेश्चू मनाया जाता है। रिवालसर झील तिब्बती समुदाय में “छो पद्मा” के नाम से पुकारी जाती है। सन् 1685 ई. को गुरु गोविन्द सिंह रिवालसर झील देखने गए थे। इसे तैरते टापू की झील भी कहा जाता है। यह झील बौद्ध भिक्षु पद्म संभव का जन्म स्थान भी माना जाता है। इस झील का व्यास 3 हैक्टेयर है।

पराशर झील, मण्डी- महर्षि पराशर के नाम से मशहूर यह झील भूमध्य रेखा से 31°45′ उत्तरी अक्षांश तथा 77°06′ पूर्वी रेखांश के मध्य समुद्रतल से 2600 मीटर की ऊँचाई पर है। यह झील मण्डी से 40 कि.मी. की दूरी पर है। इस झील के साथ पराशर ऋषि का पैगोडा शैली में बना भव्य मन्दिर है। इस झील की परिधि लगभग आधा कि.मी. अर्थात एक हैक्टेयर है।

कुमरवाह झील, मण्डी– कुमरवाह झील कामरू देवता के नाम से प्रसिद्ध है। यह झील मण्डी से 40 कि.मी. की दूरी पर है। कामरू देवता का मण्डी के चच्योट में अधिराज्य स्थापित है। यह झील मण्डी जिले की चच्योट तहसील में है। यह झील समुद्रतल से 3150 मीटर की ऊँचाई पर है।

 सुन्दरनगर झील, मण्डी– यह कृत्रिम झील पण्डोह नामक स्थान पर व्यास नदी पर बांध बनने के कारण अस्तित्व में आई है। व्यास नदी के जल प्रवाह को नहरों व सुरगों के द्वारा पण्डोह के समीप सलापड़ नामक स्थान पर सतलुज नदी के साथ मिलाया गया है। यह हिमाचल की सबसे छोटी कृत्रिम झील है। इसकी लम्बाई 14 कि.मी. है।

 सुखसरझील, मण्डी- यह झील रिवालसर कस्बे की चोटियों पर समुद्रतल से 1760 मीटर की समीप पर स्थित है।

चन्द्रनाहन झील, रोहडू- यह झील रोहडू उपमण्डल की चांसल नामक घाटी में भूमध्य रेखा से 31°22′ उत्तरी अक्षांश तथा 78°06′ पूर्वी रेखांश के मध्य समुद्रतल से 3960 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह झील पब्बर नदी का उद्गम स्त्रोत भी है। इस स्थान को चारमाई ताल भी कहते है। इस झील का व्यास एक हैक्टेयर है।

तानु जुब्बड़ झील, नारकण्डा, शिमला- यह झील शिमला से 68 कि.मी. की दूरी पर है। यह झील मशहूर पर्यटक स्थल हाटू के समीप है। इस झील के समीप पर भगवती दुर्गा का रियासती मन्दिर है। यहां एक रियासती दुर्ग के खण्डहर भी है। यह झील समुद्रतल से 2708 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

शुक्र के पिता महर्षि भृगु के नाम से विख्यात है भृगु झील

कुल्लू- यह झील विशिष्ट गांव के समीप भूमध्य रेखा से 32°17′ उत्तरी अक्षांश तथा 77°14′ पूर्वी रेखांश के मध्य समुद्रतल से 4240 मीटर की ऊँचाई पर मनाली से 13 कि.मी. की दूरी पर है। इस झील का व्यास 3 हैक्टेयर है। यह एक भव्य पर्यटक स्थल है। यह झील शुक्र के पिता महर्षि भृगु के नाम से विख्यात है। जनश्रुति है कि इस झील में हर वर्ष 20 भादों को देवी-देवता स्नान के लिये आते हैं।

दशहर झील, कुल्लू- यह झील भी मनाली के समीप रोहतांग दर्रे पर है। यह झील भूमध्य रेखा से 32°22′ उत्तरी अक्षांश तथा 77°13′ पूर्वी रेखांश के मध्य यह समुद्रतल से 4200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पर है। पर्यटन की दृष्टि से भृगु तथा दशहर दोनों झीलें महत्त्वपूर्ण हैं। दशहर झील का व्यास 4 हैक्टेयर है।

नैनसर झील, कुल्लू- यह झील ऑऊटर सिराज में भीमद्वार और श्रीखण्ड पर्वत के बीच स्थित है। इस झील की समुद्रतल से 4000 मीटर की ऊँचाई है।

मानतलाई झील, कुल्लू- यह झील पिन पार्वती घाटी में भूमध्य रेखा से 31°51′ उत्तरी अक्षांश तथा 77°47′ पूर्वी रेखांश के मध्य समुद्रतल से 4160 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसका व्यास 3 हेक्टेयर है। यह झील पार्वती नदी का उद्‌गम स्रोत है।

सरयोलसर झील, कुल्लू- यह झील जलोड़ी जोत से लगभग 5 कि.मी. की दूरी पर समुव्रतल से 3100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस झील की परिधि लगभग 0.5 हेक्टेयर है। यह झील बंजार उपमण्डल में (बजार-आनी-निरमण्ड) पड़ती है।

नाको झील, पूह- यह झील पूह उपमण्डल में हंगरंग घाटी में स्थित है। यह झील भूमध्य रेखा से 31°52′ उत्तरी अक्षांश तथा 78°37 पूर्वी रेखांश के मध्य समुद्रतल से 3,604 मीटर की ऊँचाई पर है। इसका व्यास एक हेक्टेयर है। नाको झील भारत-चीन (तिब्बत) की सीमा विभाजक पर्वत श्रृंखला रियो परजियल (6816 मीटर) की पश्चिमी ढलान पर है। इसी उच्च शिखर को भगवान परजियल का वास भी बताया जाता है।

धार्मिक आस्था में माँ रेणुका और बेटे परशुराम के प्यार दुलार की स्मृति है रेणु‌का झील

श्री रेणु‌का जी झील, सिरमौर- यह झील भूमध्य रेखा में 30°36′ उतरी अक्षांश तथा 77°27′ रेखांश के मध्य समुद्रतल से 660 मीटर की उंचाई पर स्थित है। यह हिमाचल की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है। विश्व की प्राकृतिक झीलों की गणना में रेणूका झील 13वें स्थान पर है। इस झील का व्यास लगभग 5 हेक्टेयर है। इस झील के समीप परशुराम ताल भी है। यह झील धार्मिक आस्था में माँ रेणुका और बेटे परशुराम के प्यार दुलार की स्मृति बताई जाती है। यह झील हिमाचल प्रदेश का एकमात्र ऐसा देवस्थल है जहां देवोत्थान एकादशी (कार्तिक मास) से पांच दिन तक अन्तर्राष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेला मनाया जाता है।

गोविन्द सागर झील, बिलासपुर- यह हिमाचल में सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है। यह झील भाखड़ा बांध निर्माण के कारण अस्तित्व में आई है। यह झील लगभग 1687 हेक्टेयर भूमि पर फैली है। इस झील की अनुमानित लम्बाई 168 कि.मी. है। यह कृत्रिम झील समुद्रतल से 673 मीटर की ऊँचाई पर है।

पौंगबांध झील, कांगड़ा- यह झील भूमध्य रेखा से 31°58′ उत्तरी अक्षांश तथा 76°03′ पूर्वी रेखांश तथा के मध्य समुद्र तल से 430 मीटर की ऊंचाई पर है। यह झील व्यास नदी पर महाराणा प्रताप सागर बांध बनने के कारण अस्तित्व में आई है। यह झील 42 कि.मी. लम्बी है। इस कृत्रिम झील का व्यास 21712 हैक्टेयर है।

डल झील, कांगड़ा- यह झील धर्मशाला से 11 क्या कि.मी. की दूरी पर धौलाधार पर्वत श्रृखंला के आंचल में भूमध्य रेखा से 32°14′ उत्तरी अक्षांश तथा 76°18 पूर्वी रेखांश के मध्य समुद्रतल से 1840 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इसका व्यास 2 हैक्टेयर है। इस झील के उत्तरी तट पर एक शिव मन्दिर है।

कारेरी झील, कांगड़ा- यह झील धर्मशाला से 28 कि.मी. की दूरी पर है। यह झील भूमध्य रेखा से 32°19′ उत्तरी अक्षांश तथा 76°16′ पूर्वी रेखांश के मध्य  समुद्रतल से 2960 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इसका व्यास 3.5 हैक्टेयर है। इस झील के किनारे भी शिव मन्दिर है।

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