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सुप्रीम कोर्ट से झटका, डेढ़ लाख कर्मचारियों के अधिकारों से खिलवाड़ – सुमीत शर्मा

बार-बार अदालत पहुंचकर कर्मचारियों के वित्तीय लाभ रोक रही कांग्रेस सरकार : सुमीत शर्मा

शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सचिव सुमीत शर्मा ने हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय लाभों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय से राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज होने पर कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सुक्खू सरकार कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय बार-बार न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर उनके वित्तीय लाभों को टालने का प्रयास कर रही है।

सुमीत शर्मा ने कहा कि यह मामला प्रदेश के लगभग 1.50 लाख कर्मचारियों के हितों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण हजारों कर्मचारियों को अपने वैध वित्तीय लाभ और वरिष्ठता के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2003 से अनुबंध आधार पर नियुक्तियां होती रही हैं। शुरुआती वर्षों में कर्मचारियों को आठ-आठ वर्ष तक अनुबंध पर रखा गया। बाद में अनुबंध अवधि सात वर्ष, पांच वर्ष, तीन वर्ष और अंततः दो वर्ष की गई। इस दौरान अनेक कर्मचारियों को नियमितीकरण से पहले की सेवा अवधि के आधार पर वित्तीय लाभ और वरिष्ठता प्राप्त करने के लिए न्यायालय जाना पड़ा।

सुमीत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट लेकर आई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के माध्यम से अनुबंध कर्मचारियों को पूर्व सेवा अवधि के आधार पर मिलने वाले लाभों से वंचित करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने संबंधित प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया और कर्मचारियों को वित्तीय लाभ तथा वरिष्ठता प्रदान करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की।

सुमीत शर्मा ने कहा कि 29 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी और कर्मचारियों को वित्तीय लाभ देने के लिए चार महीने का समय दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी सरकार ने आदेशों का पालन करने के बजाय पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे भी सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इस कार्यप्रणाली से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब न्यायालय कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय दे चुका है तो सरकार उनके लाभों का भुगतान करने में देरी क्यों कर रही है। सुमीत शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार आर्थिक तंगहाली का हवाला देकर कर्मचारियों के अधिकारों को अनिश्चितकाल तक नहीं टाल सकती। उन्होंने मांग की कि सरकार अदालती आदेशों का सम्मान करते हुए पात्र कर्मचारियों को देय वित्तीय लाभ और वरिष्ठता संबंधी अधिकार शीघ्र प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि भाजपा कर्मचारियों के हितों से जुड़े इस मुद्दे को उठाती रहेगी और कांग्रेस सरकार से जवाबदेही की मांग करेगी।

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