‘स्टेट लीडर के बजाय रियल एस्टेट डीलर’ की तरह बातें कर रहे हैं मुख्यमंत्री सुक्खू – जयराम ठाकुर
‘स्टेट लीडर के बजाय रियल एस्टेट डीलर’ की तरह बातें कर रहे हैं मुख्यमंत्री सुक्खू – जयराम ठाकुर
शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक ‘स्टेट लीडर की बजाय रियल एस्टेट डीलर’ की तरह बातें कर रहे हैं, जो सिर्फ जमीन बेचकर पैसा अंदर करना जानता है। इसीलिए उन्होंने प्रदेश भर में धारा 118 में छूट के नाम पर अराजकता फैलाने के लिए अपने मित्रों का नेटवर्क बनाया है, जो धारा 118 के नाम पर छूट दिलाने का ठेका लेकर घूम रहे हैं। उन्हीं के इशारे पर बार-बार धारा 118 में ढील देने का कानून विधानसभा में लाया जा चुका है। व्यवस्था परिवर्तन वाली सरकार को भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के भारी विरोध के बाद इस दिशा में थोड़ा रुकना पड़ा है। आज मुख्यमंत्री इंडस्ट्रियल पैकेज की आलोचना कर रहे हैं, जबकि उन्हें इस दिशा में और काम करना चाहिए था। उन्हें प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा उद्योग-धंधे लगाने और बेहतर ढंग से काम करने पर ध्यान देना चाहिए था। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सरकार चला रहे सुक्खू इसके विपरीत काम कर रहे हैं। उनके संरक्षण में प्रदेश का औद्योगिक क्षेत्र अवैध वसूली का अड्डा बन गया है, जिस कारण उद्योग पलायन करने को विवश हैं। आज हिमाचल के उद्योग पड़ोसी राज्यों में जा रहे हैं और सरकार उन्हें रोकने की बजाय प्रताड़ित करने पर जोर दे रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि ‘हिमाचल फॉर सेल’ की योजना पर काम करने वाले मुख्यमंत्री औद्योगिक पैकेज को घोटाला बता रहे हैं तो इसकी जांच करें और उस योजना को रद्द कर दें। जिस मुख्यमंत्री ने बिना सोचे-समझे 1,500 से ज्यादा विद्यालय, सैकड़ों अस्पताल, कुल 2,000 से ज्यादा जनहित के संस्थान बिना मंत्रिमंडल के गठन के ही बंद कर दिए हों, उनके लिए एक इंडस्ट्रियल पैकेज को रद्द करना कौन-सी बड़ी बात है? चार साल से कोई काम करने की बजाय वह सिर्फ प्रवचन दे रहे हैं। काम करने की बजाय काम बिगाड़ने में ही सुख की अनुभूति करने वाले मुख्यमंत्री जानते हैं कि जब झूठ बोलकर ही समय निकाला जा सकता है तो प्रदेश के विकास में भूमिका निभाने वाले उद्योगों को बढ़ावा देकर क्या मिलेगा? मुख्यमंत्री आए दिन मंचों से हिमाचल प्रदेश को सिर्फ अपने भाषणों में ही 2027 तक आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने की बातें करके लोगों को बहला रहे हैं। औद्योगीकरण की आलोचना करना कांग्रेस का मूल चरित्र बन गया है, क्योंकि औद्योगीकरण विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। मुख्यमंत्री औद्योगीकरण का विरोध करके 2027 में हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और 2032 में समृद्ध राज्य बनाने के अपने दावों को ही कमजोर कर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि पहले भी हिमाचल प्रदेश और देश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए विशेष सुविधाएं दी जाती रही हैं। कांग्रेस के समय में भी इसी तरह उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रयास किए गए। देश के हर हिस्से में उद्योग लाने के लिए राज्य सरकारें विभिन्न प्रकार के इंसेंटिव देती हैं। लेकिन जब मुख्यमंत्री का विजन ही ऐसा नहीं है कि वह औद्योगीकरण के दीर्घकालिक लाभों का आकलन कर सकें और उससे प्रदेश को होने वाले लाभों को समझ सकें, तो विकास कैसे होगा? उन्होंने कहा कि बिना औद्योगीकरण के दुनिया में कोई भी राष्ट्र तरक्की नहीं कर पाया। आज जिन प्रदेशों की माली हालत बेहतर है, उनमें औद्योगीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। औद्योगीकरण से प्रदेश में निवेश आता है, राज्य की आर्थिकी मजबूत होती है, रोजगार के प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अवसर सृजित होते हैं। पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलती है, पलायन रुकता है और दीर्घकालिक आर्थिक अवसर सृजित होते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री का सारा ध्यान प्लॉटिंग के जरिए ही पैसा कमाने पर है। इसीलिए वह प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने की बजाय प्लॉटिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क में भी प्लॉट बेचने को लेकर सरकार के नेताओं के बीच ही घमासान मचा हुआ है। बल्क ड्रग पार्क में भी सरकार प्लॉटिंग से आगे नहीं सोच पा रही है, जबकि ये परियोजनाएं हिमाचल प्रदेश का कायाकल्प करने की क्षमता रखती हैं। मेडिकल कॉलेज के भवन का उद्घाटन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र के योगदान का नाम नहीं ले रहे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो सुधार हो रहे हैं, उनमें केंद्र सरकार का सर्वाधिक योगदान है, लेकिन मुख्यमंत्री सारा श्रेय स्वयं ले रहे हैं और केंद्र सरकार के प्रति आभार जताने के बजाय आए दिन दोषारोपण करते हैं। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग के बारे में भी प्रदेश की जनता को बताना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अब रोबोटिक सर्जरी की फीस 90,000 रुपये कर दी गई है। लगभग एक साल में रोबोटिक सर्जरी की फीस तीन गुना बढ़ा दी गई, जबकि मुख्यमंत्री ने पिछले साल अगस्त में इसे हिम केयर और आयुष्मान के तहत शामिल करने का भरोसा दिया था। यह भरोसा आज तक पूरा नहीं हुआ। उल्टा सरकार हिम केयर को ही बदनाम करके बंद करने पर आमादा है। मुख्यमंत्री को अपनी कथनी और करनी में फर्क नहीं करना चाहिए।