पूर्व भाजपा सरकार सीमित संसाधनों का अनुचित दोहन न करती और भ्रष्टाचार को संरक्षण न देती तो प्रदेश पर देनदारियों का न पड़ता इतना बोझ – कांग्रेस मंत्री
पूर्व भाजपा सरकार सीमित संसाधनों का अनुचित दोहन न करती और भ्रष्टाचार को संरक्षण न देती तो प्रदेश पर देनदारियों का न पड़ता इतना बोझ – कांग्रेस मंत्री
शिमला: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज यहां कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2017 से 2022 तक भाजपा की सरकार रही और यह दौर हिमाचल के लिए विकास की दृष्टि से काला अध्याय रहा। उन्होंने कहा कि डबल ईंजन का नारा लगाने वाली भाजपा ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में हिमाचल के विकास में कोई महत्त्वपूर्ण योगदान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल से संबंध रखने वाले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा ने वित्तीय चुनौतियों के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक प्रबन्धनों को दरकिनार कर राजनीति से प्रेरित और तथ्यहीन बयान दिए हैं। ऐसे बयान भाजपा की नकारात्मक कार्यशैली और प्रदेश में उनके कम होते जनाधार से उपजी भाजपा की बौखलाहट का नतीजा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कार्यान्वित की जा रही है जिसमें केन्द्र सरकार 90 प्रतिशत और प्रदेश सरकार शेष 10 प्रतिशत का आर्थिक योगदान देती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के हिस्से के रूप में हिमाचल को योजना के तहत वर्ष 2021-26 के दौरान 112 करोड़ रुपये अब तक जारी नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 से अब तक वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान 2.85 हजार लोगों का उपचार किया गया है जिस पर लगभग 420 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। लोगों के उपचार के लिए आयुष्मान भारत के तहत हिमाचल का वित्तीय हिस्सा 90-10 के प्रावधान के तहत लगभग 59 करोड़ बनता था लेकिन प्रदेश सरकार ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए लगभग 203 करोड़ रुपये अपने संसाधनों से जुटाकर अतिरिक्त व्यय किया है। यह राशि प्रदेश के निर्धारित हिस्से से लगभग चार गुणा अधिक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हिमाचल को तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा, वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा जनकल्याण की दिशा में उठाए गए कदमों को रोककर प्रदेश हित के विपरीत कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन के तहत क्रिटिकल केयर ब्लॉक, जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट आदि सुविधाओं के विकास के लिए 360 रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें 90 प्रतिशत केन्द्रीय हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इस राशि का महत्त्वपूर्ण हिस्सा अब तक राज्य को नही मिला है। केन्द्र सरकार द्वारा पर्याप्त धनराशि जारी न करने के कारण लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी इन महत्त्वपूर्ण अधोसंरचनाओं एवं सुविधाओं का विकास अधूरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को मंहगाई भत्ता भी नहीं दिया और पे-कमिशन की देनदारियां देने में भी असमर्थ रही। उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र सरकार समय-समय पर प्रदेश को विभिन्न मदों में राज्य के हक का पैसा निर्धारित समयावधि में जारी करना सुनिश्चित करे तो विभिन्न परियोजनाएं और अधोसंरचना विकास के कार्य समय पर पूरे किए जा सकते हैं जिससे आमजन को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर पूर्णतः रोक लगाई है और पूर्ण पारदर्शिता तथा जवाबदेही भी सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि यदि आयुष्मान भारत के तहत केन्द्र सरकार के हिस्से की लम्बित राशि हिमाचल को समय पर मिलती तो प्रदेश में निर्माणाधीन 9 क्रिटिकल ब्लॉक, 12 जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं, 38 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर तथा 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट समय पर तैयार होते और प्रदेशवासियों को घर द्वार पर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने में सहयोग मिलता। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने जब दिसम्बर, 2022 में प्रदेश की बागडोर खुद सम्भाली तो उस समय हिमाचल प्रदेश पर लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की कर्मचारियों की देनदारियां थी। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व भाजपा सरकार प्रदेश के सीमित संसाधनों का अनुचित दोहन न करती और भ्रष्टाचार को संरक्षण न प्रदान करती तो प्रदेश पर देनदारियों का इतना बोझ न पड़ता।