सुख के नाम पर शुल्क की सरकार चला रहे हैं मुख्यमंत्री – जयराम ठाकुर
सुख के नाम पर शुल्क की सरकार चला रहे हैं मुख्यमंत्री – जयराम ठाकुर
शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख के नाम पर शुल्क की सरकार चला रहे हैं। सरकार को अपने फैसलों से जनता को होने वाली तकलीफों से कोई मतलब नहीं है। बिना सोचे-समझे प्रदेश के लोगों पर कर लादा जा रहा है। सरकार के मनमाने कर लादने पर माननीय उच्च न्यायालय ने भी सरकार को नसीहत देते हुए उद्योगों पर मनमाने कर के आदेश को रद्द कर दिया है। सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस ने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन सरकार में आते ही जनता पर तरह-तरह के बोझ डालने का अभियान चलाया। सत्ता में आने के बाद से डीजल पर दो बार वैट बढ़ाने के बाद सुक्खू सरकार ने अब पेट्रोल तथा डीजल पर 60 पैसे का सेस लगा दिया गया है। जब सरकार ने यह बिल लाया था, हमने विधानसभा में कहा था कि पेट्रोलियम पर टैक्स का व्यापक प्रभाव पड़ता है। सभी चीजें महंगी हो जाती हैं। तो मुख्यमंत्री ने सदन में कहा था कि यह एक प्रावधान है, हम इसे लगाने नहीं जा रहे हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उनका दावा झूठा निकला।
जयराम ठाकुर ने कहा कि अनाथ और विधवा सेस के नाम पर लोगों से पैसे वसूल कर सरकार चलाने की कोशिश हो रही है। हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य है, जहाँ पर यातायात और आपूर्ति व्यवस्था सड़क मार्ग पर ही निर्भर है। ऐसे में डीजल-पेट्रोल पर यह वृद्धि बुरी तरह से आम लोगों को प्रभावित करेगी। सरकार की शुल्क लगाने की प्रवृत्ति पर माननीय उच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी करते हुए सरकार के एक आदेश को रद्द करते हुए “कर लादने” में भी बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता दिखाने की नसीहत दी है। सरकार लोगों से सुविधाएं छीन रही है। पूर्व सरकार के समय चलाई गई जनहित की योजनाओं को बंद किया जा रहा है। केवाईसी और तकनीकी समस्या के नाम पर बुजुर्गों की वृद्धावस्था पेंशन रोकी जा रही है। सहारा पेंशन न देने के लिए लोगों को सीधे मृत घोषित कर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि सुख के नाम पर शुल्क की सरकार चलाना बंद करें।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सुविधाएं महंगी हो गई हैं। जन सुविधाएं देने के बजाय छीनने की कोशिश हो रही है। विश्वविद्यालयों में छात्र मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। अस्पतालों में लोग इलाज के लिए भटक रहे हैं। कैंसर से लेकर अत्यावश्यक और सामान्य दवा अस्पतालों में नहीं मिल रही है। हिम केयर कार्ड चल नहीं रहा है। लोगों को एक-एक साल बाद सर्जरी की तारीख और महीनों बाद जांच की तारीख मिल रही है। मोदी सरकार ने जीएसटी घटाकर आम जनमानस से जुड़ी चीजें सस्ती कीं, तो सुक्खू सरकार ने सुविधाओं पर शुल्क बढ़ा दिए। सीमेंट पर 10 जीएसटी घटाया तो सुक्खू सरकार ने एजीटी लगाकर दाम बढ़ा दिए। लोगों के रोजमर्रा से जुड़ी चीजें महंगी करके जीना दुश्वार कर रही है। मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि एक जनकल्याणकारी राज्य का काम लोगों को सुविधाएं देना है, कर लादना नहीं।