शिमला में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव रोकना लोकतंत्र के साथ खुला खिलवाड़ – जयराम ठाकुर
शिमला में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव रोकना लोकतंत्र के साथ खुला खिलवाड़ – जयराम ठाकुर
शिमला: नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव अब तक नहीं करवाए जाने को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शिमला जिला परिषद के निर्वाचित सदस्यों को अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाने के लिए दोबारा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। यह स्थिति अपने आप में बताती है कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और जनता के जनादेश के प्रति सरकार का रवैया क्या है।
उन्होंने कहा कि ममता एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य के नाम से 10 अगस्त को दायर याचिका में 13 निर्वाचित जिला परिषद सदस्यों ने राज्य निर्वाचन आयोग, हिमाचल प्रदेश सरकार और उपायुक्त शिमला को प्रतिवादी बनाते हुए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए वैधानिक बैठक तत्काल बुलाने की मांग की है। याचिका में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 90 और निर्वाचन नियमों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का आग्रह किया गया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की तारीखें अपने आप सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। शिमला जिला परिषद में 25 निर्वाचित सीटें हैं। पंचायत चुनाव तीन चरणों—26 मई, 28 मई और 30 मई 2026—में हुए और मतगणना के बाद 31 मई/1 जून को परिणाम घोषित किए गए। इसके बाद निर्वाचित सदस्यों की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होनी थी। उन्होंने कहा कि 3 जून 2026 को उपायुक्त शिमला ने सभी निर्वाचित सदस्यों को 6 जून की बैठक में बुलाने का नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में बाकायदा हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 90 और 127 का उल्लेख किया गया था। 6 जून को सभी निर्वाचित सदस्य उपस्थित हुए, आवश्यक कोरम पूरा था और सभी को शपथ भी दिलाई गई। इसके बावजूद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया गया तथा बैठक को बिना कोई कारण बताए स्थगित कर दिया गया।
जयराम ठाकुर ने कहा, “यही सबसे बड़ा सवाल है। जब पूरा सदन मौजूद था, कोरम पूरा था, शपथ हो चुकी थी तो अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं कराया गया? किसके फोन का इंतजार था? किसके राजनीतिक निर्देश पर वैधानिक प्रक्रिया को बीच में रोका गया? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।”
धारा 90 कहती है—शपथ के तुरंत बाद हो अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोप का विषय नहीं है। याचिका में उद्धृत हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 90 के अनुसार परिणाम घोषित होने के बाद उपायुक्त को यथाशीघ्र और अधिकतम एक सप्ताह के भीतर निर्वाचित सदस्यों की बैठक बुलानी है। इसके बाद धारा 127 के तहत शपथ/प्रतिज्ञान होते ही निर्वाचित सदस्यों को अपने में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनना है। उन्होंने कहा कि जब 6 जून को पूरा निर्वाचित सदन मौजूद था और शपथ हो गई थी, तब चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना वैधानिक प्रक्रिया का अगला चरण था। याचिका में भी आरोप लगाया गया है कि बैठक स्थगित करते समय कोई कारणयुक्त आदेश पारित नहीं किया गया, कोई वैधानिक आधार नहीं बताया गया और कोई ऐसी कानूनी बाधा नहीं बताई गई जिसके कारण अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव रोका जाना आवश्यक था। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 6 जून को ऐसा क्या हुआ कि शपथ तो करवा दी गई लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं होने दिया गया। यदि कानून चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने को कहता है तो प्रशासन ने उसे रोकने का अधिकार कहां से प्राप्त किया?
27 जून, फिर 3 अगस्त—बैठक पर बैठक, लेकिन नेतृत्व का चुनाव अधूरा
जयराम ठाकुर ने कहा कि इसके बाद घटनाक्रम और भी गंभीर होता गया। 20 जून को एक और नोटिस जारी कर 27 जून को बैठक रखी गई। याचिका के अनुसार उस बैठक के नोटिस में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव का स्पष्ट एजेंडा तक नहीं बताया गया और 27 जून की बैठक में केवल 11 निर्वाचित सदस्य उपस्थित हुए। उपायुक्त स्वयं बैठक में मौजूद नहीं थे और बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त ने की। अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की लंबित चुनाव प्रक्रिया फिर पूरी नहीं हुई।
इसके बाद 20 जुलाई को एक और नोटिस जारी कर 3 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे बचत भवन, उपायुक्त कार्यालय शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई। इस नोटिस में धारा 90 और नियम 86 के तहत चुनाव का स्पष्ट उल्लेख था। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि एक निर्वाचित संस्था को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने के लिए आखिर कितनी बैठकों की आवश्यकता है? जनता अपना फैसला दे चुकी है, सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं, शपथ हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से प्रक्रिया लगातार लंबी होती जा रही है।
“कांग्रेस को संख्या नहीं मिली तो प्रशासन को बनाया राजनीतिक औजार”
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनावों में जनता ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया है। अब जहां कांग्रेस के पक्ष में संख्या नहीं है, वहां प्रशासनिक प्रक्रिया को लंबा खींचकर राजनीतिक समीकरण बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में सरकारें बहुमत बनाती नहीं हैं, जनता बहुमत देती है। जिस दल को जनता ने जितनी सीटें दी हैं उसे स्वीकार करना होगा। प्रशासन का इस्तेमाल करके निर्वाचित प्रतिनिधियों की इच्छा को रोकना या समय हासिल करके राजनीतिक जोड़-तोड़ की गुंजाइश पैदा करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।”
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किसी राजनीतिक दल का कार्यालय नहीं है। उपायुक्त कार्यालय को कांग्रेस का राजनीतिक अड्डा नहीं बनने दिया जा सकता। अधिकारी संविधान और कानून के प्रति जवाबदेह हैं, किसी मुख्यमंत्री, मंत्री अथवा राजनीतिक दल के प्रति नहीं।
हाईकोर्ट के 6 अगस्त के फैसले के बाद बहाने की गुंजाइश नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का 6 अगस्त 2026 का CWP No. 11710/2026, Ankush Indoria बनाम State Election Commission & Others का निर्णय है। यह मामला पंचायत समिति इंदौरा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी से संबंधित था। संलग्न निर्णय में दर्ज है कि निर्वाचित सदस्यों ने शपथ ले ली थी, लेकिन अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया गया था और कोई तारीख भी अधिसूचित नहीं हुई थी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि शिमला जिला परिषद के सदस्यों की नई याचिका इसी फैसले का हवाला देते हुए कहती है कि निर्वाचित स्थानीय निकाय के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को कार्यपालिका की निष्क्रियता या हस्तक्षेप से अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता। याचिका में यह भी दर्ज है कि उक्त निर्णय की प्रति मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों से जुड़े सभी अधिकृत अधिकारियों तक तत्काल पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे।
उन्होंने कहा, “जब हाईकोर्ट का फैसला सामने है, कानून सामने है और चुने हुए सदस्य सामने हैं तो सरकार किस चीज का इंतजार कर रही है? क्या अब हर जिला परिषद और पंचायत समिति को अपना अध्यक्ष चुनने के लिए पहले हाईकोर्ट जाना पड़ेगा?”
13 सदस्यों का कोर्ट पहुंचना सरकार के लिए शर्मनाक
जयराम ठाकुर ने कहा कि आज स्थिति यह है कि शिमला जिला परिषद के 13 निर्वाचित सदस्यों को उच्च न्यायालय से मंडामस की मांग करनी पड़ी है कि प्रशासन को निर्देश दिया जाए कि सभी निर्वाचित सदस्यों की विशेष वैधानिक बैठक बुलाकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव पूरा कराया जाए। याचिका में चुनाव को एक निश्चित और कम समय-सीमा में कराने तथा प्रक्रिया को बिना कानूनी कारण के आगे स्थगित न करने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि याचिका में न्यायालय से 3 जून, 6 जून, 20 जून, 27 जून, 20 जुलाई और 3 अगस्त से संबंधित बैठकों, नोटिसों और कार्यवाही का पूरा मूल रिकॉर्ड तलब करने तथा चुनाव न कराने अथवा स्थगित करने के निर्णय और उसके कारणों की जांच करने का भी आग्रह किया गया है।
जयराम ठाकुर ने कहा, “सरकार को स्वयं सोचना चाहिए कि लोकतंत्र की इससे दुर्भाग्यपूर्ण तस्वीर क्या होगी कि जनता वोट देकर अपने प्रतिनिधि चुनती है, निर्वाचित प्रतिनिधि शपथ लेते हैं और फिर उन्हीं प्रतिनिधियों को अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने के अधिकार के लिए अदालत जाना पड़ता है।”
जिला परिषद केवल राजनीतिक पद नहीं, विकास की महत्वपूर्ण संस्था
उन्होंने कहा कि जिला परिषद का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष न होना केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है। याचिका में भी जिला परिषद को तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा गया है कि यह जिला स्तर पर विकास योजनाओं की योजना, समन्वय, निगरानी और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका काम विशेषकर ग्रामीण, गरीब, कमजोर, दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों के विकास एवं कल्याण से सीधे जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार की राजनीतिक जिद के कारण निर्वाचित संस्था को पूर्ण रूप से कार्यशील न होने देना अंततः शिमला जिला की जनता के विकास को प्रभावित करता है। कांग्रेस अपनी राजनीतिक हार का बदला जनता के विकास से नहीं ले सकती।
“अब चुनाव कराइए, जनादेश का सामना कीजिए”
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से कहा कि सरकार प्रशासन के पीछे छिपना बंद करे। यदि कांग्रेस के पास बहुमत है तो चुनाव करवाकर अपना अध्यक्ष बनाए और यदि बहुमत नहीं है तो जनता के जनादेश को सम्मानपूर्वक स्वीकार करे।उन्होंने कहा, “भाजपा की मांग बिल्कुल स्पष्ट है—शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए तत्काल स्पष्ट तारीख, समय और स्थान तय कर वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाए। अब कोई बहाना, कोई राजनीतिक दबाव और कोई प्रशासनिक टालमटोल स्वीकार नहीं होगी।”जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और जनता के जनादेश की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय तक हर लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेगी। कांग्रेस सरकार यह समझ ले कि जनादेश को फाइलों में दबाया नहीं जा सकता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को प्रशासनिक आदेशों से अनिश्चितकाल के लिए रोका नहीं जा सकता।