शिमला के राजकीय कन्या महाविद्यालय में 30 विद्यार्थियों को दिया गया उद्यमिता प्रशिक्षण
शिमला के राजकीय कन्या महाविद्यालय में 30 विद्यार्थियों को दिया गया उद्यमिता प्रशिक्षण
शिमला: राजकीय कन्या महाविद्यालय, शिमला में 5 से 7 अगस्त तक आयोजित तीन दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय के 30 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा उद्यमिता, नवाचार, स्टार्टअप विकास एवं व्यवसाय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की शुरुआत राजकीय कन्या महाविद्यालय, शिमला की उप-प्रधानाचार्य डॉ. कार्तिक एस.एम. चौहान तथा वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज शर्मा द्वारा की गई। कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. अनुरिता सक्सेना भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में गौतमी श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। इसके अतिरिक्त उद्योग विभाग से जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी), शिमला के वरिष्ठ सलाहकार वरुण शुक्ला तथा एनआईटीकॉन से अंकुश वर्मा एवं शिखा कंवर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के पहले दिन प्रतिभागियों को उद्यमशील मानसिकता, अवसर आधारित सोच, समस्या की पहचान एवं ग्राहक व्यवहार को समझने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने संवादात्मक सत्रों के माध्यम से बताया कि उपयोगकर्ता साक्षात्कार, ग्राहक व्यक्तित्व मानचित्रण तथा प्रमाण-आधारित समस्या विवरण के माध्यम से एक प्रभावी व्यावसायिक विचार को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। इसके साथ ही विचार सत्यापन, न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद, मूल्य प्रस्ताव तथा व्यवसाय मॉडल की मूलभूत अवधारणाओं पर भी कार्यशाला आयोजित की गई। दूसरे दिन बाजार में प्रवेश की रणनीतियों, स्टार्टअप संचालन प्रणाली, वित्त एवं मूल्य निर्धारण की मूलभूत जानकारी तथा स्टार्टअप से संबंधित अनुपालन एवं जोखिम प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को टीम निर्माण, नेतृत्व क्षमता एवं स्टार्टअप संस्कृति के विकास के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया। दिन के समापन पर आयोजित समूह गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने पहचानी गई समस्याओं को व्यवहार्य स्टार्टअप अवधारणाओं में परिवर्तित करने का अभ्यास किया। कार्यक्रम के अंतिम दिन विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक विचारों की प्रस्तुति, उद्यम की तैयारी, व्यवसाय मॉडल तथा अंतिम परियोजना प्रस्तुति की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इसके साथ ही स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं संस्थागत सहयोग की जानकारी भी दी गई। समापन सत्र में विद्यार्थियों ने समूहों में अपने-अपने स्टार्टअप विचार एवं व्यवसाय मॉडल विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किए, जिनका मूल्यांकन विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन समारोह में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उद्यमिता केवल अपना व्यवसाय स्थापित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, चुनौतियों का सामना करने, उचित जोखिम उठाने तथा ईमानदारी, अनुशासन एवं नवाचार के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। समापन समारोह के दौरान महाविद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. अनुरिता सक्सेना ने सभी 30 प्रतिभागियों को कार्यक्रम में सहभागिता के प्रमाण-पत्र प्रदान किए। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों एवं उपलब्ध अवसरों के अनुरूप नवाचार आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए विस्तृत मार्गदर्शन दिया। साथ ही भविष्य में स्टार्टअप से जुड़े व्यवसाय की व्यवहार्यता, बाजार से जुड़ाव, वित्तीय योजना एवं प्रभावी रणनीतियों के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रदान किए गए। राजकीय कन्या महाविद्यालय, शिमला में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें केवल रोजगार प्राप्त करने के बजाय रोजगार सृजित करने की दिशा में प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने नवीन विचारों को व्यावहारिक व्यवसायिक अवसरों में परिवर्तित करने तथा आत्मनिर्भर उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्रदान किए गए।