हिमाचल: बिजली बोर्ड के 43 हजार कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को मिलेगा कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज का लाभ, 7 बैंकों के साथ MOU साइन
हिमाचल: बिजली बोर्ड के 43 हजार कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को मिलेगा कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज का लाभ, 7 बैंकों के साथ MOU साइन
शिमला: कर्मचारियों के कल्याण की एक अहम पहल के तहत, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड ने एक व्यापक कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज लागू करने के लिए सात बैंकों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयु) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पैकेज के तहत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बेहतर बैंकिंग सुविधाएँ, मुफ्त बीमा कवरेज और कई तरह के अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलेंगे।
इन एमओयु पर आज शिमला के विद्युत भवन में बोर्ड के चेयरमैन डॉ. प्रबोध सक्सेना की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। इस समारोह में निदेशक (वित्त) श्रवण कुमार मंाटा (वित्त), कार्यकारी निदेशक (कार्मिक) ईशा ठाकुर, मुख्यालय के मुख्य अभियंता, बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड की ओर से बोर्ड के मुख्य लेखा परीक्षक अर्जुन सिंह ठाकुर ने एमओयु पर हस्ताक्षर किए, जबकि संबंधित बैंकों के अधिकृत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संस्थानों की ओर से हस्ताक्षर किए।
इन एमओयु में सात बैंकों ने भाग लियाः-
पंजाब नेशनल बैंक
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
बैंक ऑफ बड़ौदा
आईसीआईसी बैंक
एचडीएफसी बैंक
हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड
कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड
इस कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज के लागू होने से हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड से जुड़े लगभग 43,000 कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बेहतर बैंकिंग सेवाओं और व्यापक बीमा सुरक्षा का लाभ मिलने की उम्मीद है।
बैठक को संबोधित करते हुए, हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. प्रबोध सक्सेना ने कहा कि यह पहल कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण और वित्तीय सुरक्षा के प्रति बोर्ड की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के कर्मचारी चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे हालात में अपनी ड्यूटी निभाते हैं, इसलिए मजबूत वित्तीय सुरक्षा कर्मचारी कल्याण का एक जरूरी हिस्सा है। उन्होंने भरोसा जताया कि कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड परिवार के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को काफी मजबूत करेगा और संगठन पर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बेहतर बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराएगा। इस मौके पर बोर्ड के डायरेक्टर (फाइनेंस) श्री श्रवण कुमार मंाटा (हि0प्र0से0) ने इस पहल को एक नए, पारदर्शी और किफायती तरीके से कर्मचारियों के कल्याण को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि बैंकों को शामिल करने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अपनी जरूरतों के हिसाब से सबसे अच्छा सैलरी अकाउंट पैकेज चुनने की सुविधा, साथ ही उन्हें अच्छे बैंकिंग प्रोडक्ट और फाइनेंशियल सर्विस का भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज के तहत, योग्य लोगों को मुफ्त इंश्योरेंस कवर मिलेगा। इसमें पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस (जिसमें दुर्घटना से मौत, पूरी तरह से स्थायी विकलांगता और आंशिक स्थायी विकलांगता शामिल है), टर्म लाइफ इंश्योरेंस और संबंधित सैलरी अकाउंट स्कीम के तहत मिलने वाले अन्य लाभ शामिल हैं। बैंक और लागू सैलरी स्लैब के आधार पर, इंश्योरेंस कवर 30 लाख से 1.50 करोड़ रूपए तक हो सकता है।
पेंशनभोगियों और कर्मचारियों के पास अपनी सुविधा और पात्रता के अनुसार अपने सैलरी अकाउंट को किसी भी शामिल बैंक में बनाए रखने या ट्रांसफर करने का विकल्प होगा। संबंधित बैंक अपनी तय शर्तों के अनुसार मौजूदा सेविंग अकाउंट को कॉर्पोरेट सैलरी अकाउंट में अपग्रेड भी कर सकते हैं, जिससे लोग बिना किसी देरी के इन लाभों का फायदा उठा सकें।
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड ने साफ किया है कि इंश्योरेंस कवर और उससे जुड़ी बैंकिंग सुविधाएँ सीधे शामिल बैंकों और उनके इंश्योरेंस पार्टनर द्वारा लागू शर्तों के अनुसार दी जाएँगी। खास बात यह है कि इस पहल से बोर्ड पर कोई सीधा फाइनेंशियल बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि सभी लाभ शामिल बैंकों द्वारा उनके कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज के तहत दिए जा रहे हैं।
इस मौके पर, हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड के कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनभोगियों की जॉइंट एक्शन कमेटी का प्रतिनिधित्व कर रहे श्री हीरा लाल वर्मा ने इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने चेयरमैन के नेतृत्व में मैनेजमेंट की कोशिशों की तारीफ की, जिन्होंने एक ऐसा कल्याणकारी कदम उठाया है जो हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड परिवार को लंबे समय तक फाइनेंशियल सुरक्षा और बेहतर सामाजिक सुरक्षा देगा।
यह पहल बोर्ड की उन लगातार कोशिशों में एक और अहम पड़ाव है, जिनका मकसद रणनीतिक संस्थागत साझेदारी के जरिए कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देना, फाइनेंशियल मजबूती बढ़ाना और अपने कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए सामाजिक सुरक्षा को बेहतर बनाना है।