सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से संवाद किया तथा संस्थान की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा की। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज ने शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के साथ कुलपति का स्वागत किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता ने महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान उपलब्धियों, प्रसार कार्यक्रमों, आधारभूत संरचना तथा भावी विकास योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
सभा को संबोधित करते हुए प्रो. बवेजा ने औद्यानिकी, वानिकी, कृषि तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न नई चुनौतियों का प्रभावी समाधान करने के लिए आवश्यकता-आधारित, बहुविषयक, नवाचार-आधारित तथा किसान-केंद्रित अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ऐसे व्यावहारिक एवं टिकाऊ प्रौद्योगिकीय समाधानों के विकास पर विशेष जोर दिया, जो किसानों की आय और आजीविका में सुधार लाने में सहायक हों। कुलपति ने संसाधनों के प्रभावी सृजन, नवाचार तथा उपलब्ध परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय को आत्मनिर्भर संस्थान के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. बवेजा ने औद्यानिकी, पारिस्थितिकी पर्यटन (ईको-टूरिज्म), उद्यमिता तथा अनुभवात्मक शिक्षण के समन्वय से हॉर्टी-टूरिज्म को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से आय के स्रोतों में विविधता आएगी, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्र की समृद्ध बागवानी विरासत को व्यापक पहचान मिलेगी।
उन्होंने अग्रणी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को और सुदृढ़ करने, बाह्य वित्तपोषित अनुसंधान परियोजनाओं को आकर्षित करने, वैज्ञानिक शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता एवं प्रभाव को बढ़ाने, उपोष्णकटिबंधीय औद्यानिकी में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों का किसानों के खेतों तक प्रभावी हस्तांतरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अपने दौरे के दौरान प्रो. बवेजा ने महाविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों, प्रयोगशालाओं, शिक्षण सुविधाओं तथा प्रायोगिक फार्म का निरीक्षण किया। उन्होंने खग्गल स्थित वानिकी अनुसंधान केंद्र, बायोचार इकाई तथा निर्माणाधीन वर्किंग महिला छात्रावास का भी दौरा किया। महाविद्यालय की आधारभूत संरचना एवं चल रही अनुसंधान गतिविधियों की सराहना करते हुए उन्होंने शिक्षकों एवं कर्मचारियों से शिक्षण, अनुसंधान, प्रसार, नवाचार तथा सतत विकास के क्षेत्रों में उत्कृष्टता की दिशा में निरंतर कार्य करने का आह्वान किया, ताकि किसानों और समाज को अधिकतम लाभ पहुंचाया जा सके।