2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने प्रधानमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने प्रधानमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन
हिमाचल: प्रदेश शिक्षक महासंघ ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों की रक्षा हेतु प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को समस्त जिला उपायुक्तों के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन प्रेषित कर संसद द्वारा वैधानिक एवं नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत अध्यक्ष विनोद सूद एवं समस्त जिलों के जिला अध्यक्षों एवं अन्य पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री एवं शिक्षा मंत्री भारत सरकार को भेजे अपने ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) संबंधी अधिसूचना तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता एवं असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है।
महासंघ के प्रांत मीडिया प्रमुख शशि शर्मा ने कहा कि वर्ष 2010 से पूर्व विभिन्न राज्यों में शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों, योग्यता मानदंडों एवं चयन प्रक्रियाओं के अनुरूप विधिवत रूप से की गई थीं। ऐसे में बाद में निर्धारित पात्रता शर्तों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता तथा विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
ज्ञापन में कहा गया है कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों ने राष्ट्र निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक चेतना तथा चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अनुभव, कार्यकुशलता एवं समर्पण को देखते हुए उनके सेवा अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। महासंघ का मानना है कि लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता तथा शिक्षकों के मनोबल दोनों के लिए हानिकारक होगा।
महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान सभी का संवैधानिक दायित्व है, किंतु जनहित में आवश्यक नीतिगत एवं वैधानिक समाधान उपलब्ध कराना संसद एवं भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए केंद्र सरकार को इस विषय में संवेदनशीलता के साथ आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
महासंघ ने केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखते हुए कहा है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से रूप से मुक्त किया जाए। इसके अतिरिक्त उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सभी सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर संसद में उपयुक्त विधेयक द्वारा संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को तुरंत राहत दी जाए तथा सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और असुरक्षा की स्थिति को समाप्त किया जाए।
महासंघ ने विश्वास व्यक्त किया है कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षक समुदाय के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार दूरदर्शी एवं न्यायपूर्ण निर्णय लेगी और लाखों शिक्षकों तथा उनके परिवारों के हितों की रक्षा करेगी।