CM सुक्खू ने कांगड़ा जिले के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों एवं उप-प्रधानों को दिलाई शपथ
CM सुक्खू ने कांगड़ा जिले के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों एवं उप-प्रधानों को दिलाई शपथ
कांगड़ा: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कांगड़ा जिला के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों एवं उप-प्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को प्रदेश को चिट्टा मुक्त बनाने और नशे के विरुद्ध जन आंदोलन को सशक्त बनाने का सामूहिक संकल्प भी दिलाया। धर्मशाला के दाड़ी मैदान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतें भारतीय लोकतंत्र की सबसे सशक्त इकाई हैं और ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने में उनकी केंद्रीय भूमिका है। पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं तथा गांवों के विकास, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के साथ-साथ सड़कों, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी सुनिश्चित करना उनका दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए, जिसकी वैचारिक आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी। राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव समयबद्ध ढंग से संपन्न करवाए तथा बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए चुनाव प्रक्रिया को सुनियोजित ढंग से संचालित किया गया। उन्होंने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और फुजूलखर्ची पर नियंत्रण के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया गया है। इसके अतिरिक्त ग्रीन बोनस, राजस्व घाटा अनुदान, शानन परियोजना, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड तथा अन्य विषयों पर हिमाचल के अधिकारों की मजबूती से पैरवी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हितों की रक्षा करते हुए 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति दी है कि इस परियोजना के जल घटक से लाभान्वित राज्य हरियाणा, राजस्थान तथा दिल्ली हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत वहन करेंगे, जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ कम होगा। परियोजना के पूर्ण होने पर प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये होगी। उन्होंने कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में रॉयल्टी संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्णय तथा वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल मामले में मिली सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे भी राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण के लिए 213.75 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके तहत अत्याधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल रेडियोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल मैमोग्राफी सहित आधुनिक उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। शिमला के विभिन्न अस्पतालों में 40 करोड़ रुपये की लागत से इमेजिंग आर्काइव एवं रिट्रीवल टेक्नोलॉजी सिस्टम (पीएसीएस) स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की जांच रिपोर्टों और चिकित्सीय अभिलेखों का डिजिटल प्रबंधन सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन को रोजगार का प्रमुख माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई पर्यटन नीति लागू की गई है। कांगड़ा जिला को पर्यटन राजधानी घोषित करने के बाद कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस कार्य से प्रभावित किसानों को लगभग 2,500 करोड़ रुपये तथा अन्य प्रभावित परिवारों को भी नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित परिवारों के लिए मकान निर्माण सहायता को बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये से आठ लाख रुपये किया गया है। सुक्खू ने विश्वास व्यक्त किया कि नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे तथा आदर्श पंचायतों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। सचिव, कृषि तथा पंचायती राज सी पालरासू ने नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी दी।