वित्त सचिव ने आरबीआई के नकदी एवं ऋण प्रबंधन कार्यक्रम का किया शुभारंभ

नकदी एवं ऋण प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर बल

शिमला: वित्त सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने शिमला में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा वित्त विभाग, राज्य कोषागार तथा प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी तथा लेखा परीक्षा) कार्यालय के अधिकारियों के लिए आयोजित नकदी एवं ऋण प्रबंधन विषयक क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीबीपी) का शुभारंभ किया।
डॉ. जैन ने प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति की जानकारी दी तथा वित्त विभाग द्वारा नकदी प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने, वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने और वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे विभिन्न प्रयासों से अवगत करवाया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के समक्ष मौजूदा वित्तीय चुनौतियों के दृष्टिगत यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता इस कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभव राज्य की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होंगे तथा नकदी प्रवाह और ऋण संचालन से संबंधित निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार लाएंगे।
डॉ. अभिषेक जैन ने इस पहल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की सराहना करते हुए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों तथा संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान आरबीआई, मुंबई के आंतरिक ऋण प्रबंधन विभाग के मुख्य महाप्रबंधक राकेश त्रिपाठी के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने नकदी प्रवाह पूर्वानुमान (कैश फ्लो फोरकास्टिंग), ऋण प्रबंधन, वेज एंड मीन्स एडवांस, अधिशेष निधियों के निवेश, वित्तीय जोखिम प्रबंधन तथा सार्वजनिक ऋण प्रबंधन की आधुनिक कार्यप्रणालियों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।
आरबीआई के विशेषज्ञों ने वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने तथा उधारी लागत को कम करने के लिए सटीक नकदी प्रवाह पूर्वानुमान, विवेकपूर्ण ऋण नियोजन, प्रभावी तरलता प्रबंधन और वित्त विभाग, कोषागार तथा महालेखाकार कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर विशेष सचिव (वित्त) सौरव जस्सल, निदेशक (कोषागार एवं लेखा)-सह-विशेष सचिव (वित्त) विजय वर्धन सहित बजट, नकदी प्रबंधन एवं ऋण संबंधी कार्यों से जुड़े अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे।

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