सोलन: नौणी विश्वविद्यालय में विस्तार एवं अनुसंधान निदेशालय में नए संयुक्त निदेशकों की नियुक्ति

सोलन: डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने अपने दो वैज्ञानिकों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए प्रसार शिक्षा निदेशालय एवं अनुसंधान निदेशालय में नए संयुक्त निदेशकों की नियुक्ति की है।

डॉ परमिंदर कौर बवेजा को विस्तार शिक्षा निदेशालय में संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण एवं संचार) नियुक्त किया गया है। क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग की विशेषज्ञ डॉ. बवेजा ने सतत कृषि, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों तथा किसान उन्मुख प्रसार गतिविधियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक अनुभवी पर्यावरण वैज्ञानिक एवं प्रसार विशेषज्ञ, डॉ. परमिंदर ने वर्ष 1998 में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा प्रायोजित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के तहत विश्वविद्यालय में कार्यभार संभाला था। शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार शिक्षा में 28 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने जलवायु विज्ञान, कृषि मौसम विज्ञान तथा जलवायु-अनुकूल कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाओं से एसएमएस एडवाइजरी के माध्यम से 2.30 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला है। वर्तमान में वे ₹37 लाख की ‘डिजिटल क्लाइमेट स्मार्ट हिल फार्मिंग’ परियोजना का नेतृत्व कर रही हैं, जिसके तहत एआई आधारित मौसम परामर्श मोबाइल एप्लिकेशन  विकसित किया जा रहा है।

डॉ. परमिंदर ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं अन्य राज्यों में क्लाइमेट स्मार्ट मॉडल गांव परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे किसानों की जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता बढ़ी है। उन्होंने अनेक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं तथा 10 पुस्तकों एवं प्रशिक्षण पुस्तिकाओं का लेखन एवं संपादन किया है। इसके अलावा उन्होंने 14 से अधिक स्नातकोत्तर एवं 4 पीएचडी छात्रों का मार्गदर्शन किया है। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2017 में उन्हें ‘प्राइड ऑफ सोलन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था।

इसके अतिरिक्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ प्रदीप कुमार को अनुसंधान निदेशालय में संयुक्त निदेशक अनुसंधान (वानिकी) नियुक्त किया गया है। डॉ. प्रदीप कुमार को अनुसंधान, प्रसार एवं शिक्षण के क्षेत्र में लगभग दो दशकों का अनुभव है। उन्होंने वन प्रबंधन प्रणालियों के वन संरचना एवं वन मिट्टी में कार्बन भंडारण क्षमता पर प्रभाव से संबंधित अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने वनों की  मिट्टी के विश्लेषण तथा बागवानी फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन पर व्यापक कार्य किया है।

इसके अलावा डॉ. कुमार ने सेब एवं खुबानी में ड्रिप सिंचाई एवं फर्टिगेशन अनुसूचियों का मानकीकरण किया है तथा नियंत्रित अल्प सिंचाई रणनीतियों का मूल्यांकन किया है। उन्होंने प्लास्टिक लाइन वाले जल टैंकों के निर्माण, पौधारोपण तथा बागों के पुनरोपण हेतु नमी संरक्षण तकनीकों के प्रदर्शन पर भी कार्य किया है। उन्होंने कई एमएससी एवं पीएचडी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में नियमित रूप से अपने शोध प्रकाशित किए हैं। 

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