सोलन: नेपाली मधुमक्खी पालकों को नवीन तकनीकों का दिया प्रशिक्षण

सोलन: नेपाल के कर्णाली प्रांत से आए 14 प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों के लिए ‘एपिकल्चर की नवीन तकनीकों’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में हुआ। समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ हरमिंदर सिंह बवेजा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

अपने संबोधन में डॉ. बवेजा ने भारत-नेपाल के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संबंध कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में साझा सीख और सहयोग के माध्यम से और अधिक मजबूत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नेपाल के किसानों एवं कृषि विशेषज्ञों को प्रशिक्षण प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। डॉ. बवेजा ने मधुमक्खी उत्पादों एवं मानव स्वास्थ्य में उनकी उपयोगिता पर भी चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से रॉयल जेली, पराग (पोलन) उत्पादन तथा रानी मधुमक्खी पालन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विस्तार शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को अधिक फील्ड एक्सपोजर उपलब्ध कराने के प्रयासों की भी सराहना की।

नेपाल से आए प्रतिभागी हरि प्रसाद पौडेल एवं लीला राम ढकाल ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में नई तकनीकों एवं आधुनिक विकासों की जानकारी मिली। प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की तथा परागणकर्ता के रूप में भौंरों (बम्बल बी) की भूमिका के बारे में सीखने पर प्रसन्नता व्यक्त की। हनी प्रोड्यूसर एसोसिएशन, कर्णाली के अध्यक्ष टीका राम थापा ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रहा तथा वे इस ज्ञान को अपने क्षेत्र के अन्य मधुमक्खी पालकों तक भी पहुंचाएंगे। उन्होंने भविष्य में विश्वविद्यालय में अधिक अवधि वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने तथा अधिक किसानों को प्रशिक्षण हेतु भेजने की इच्छा भी व्यक्त की।

डॉ डी पी शर्मा  ने नेपाल के बागवानी क्षेत्र में कर्णाली प्रांत के महत्व तथा पूरे नेपाल में मधुमक्खी पालन की व्यापक संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को व्यावहारिक एवं हैंड्स ऑन प्रशिक्षण प्रदान करना था, ताकि वे अपने क्षेत्रीय कार्यों में नई तकनीकों को आसानी से लागू कर सकें।

प्रशिक्षण समन्वयक  डॉ अजय शर्मा  ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को हनी प्रोड्यूसर एसोसिएशन, कर्णाली, नेपाल द्वारा प्रायोजित किया गया था। प्रशिक्षण में संसाधन व्यक्तियों के रूप में कीट विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों के साथ-साथ मधुमक्खी पालन वैज्ञानिक डॉ राज कुमार ठाकुर  ने भी भाग लिया। डॉ. ठाकुर विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं तथा उन्होंने डाबर नेपाल प्राइवेट लिमिटेड में भी सेवाएं दी हैं।

समापन समारोह में नियंत्रक प्रेम सागर कौशल सहित डॉ. पीयूष मेहता, डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. किरण ठाकुर तथा प्रसार शिक्षा निदेशालय के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

सम्बंधित समाचार

Comments are closed