सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में उठाया हिमाचल में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं का मुद्दा..
सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में उठाया हिमाचल में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं का मुद्दा..
केंद्र सरकार ने बताया – AI आधारित चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र से पहाड़ी राज्यों को मिलेगा लाभ
शिमला: शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश विशेषकर शिमला और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने वर्ष 2025 के मानसून और प्री-मानसून के दौरान प्रदेश में अत्यधिक वर्षा, शहरी बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं में हुई वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि इन आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और विशेष तंत्र के माध्यम से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
इस प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि देश में आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में संशोधन कर धारा 41-A जोड़ी गई है, जिसके तहत राज्य सरकारों को राजधानी और नगर निगम क्षेत्रों में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Urban Disaster Management Authority – UDMA) गठित करने का अधिकार दिया गया है, ताकि शहरी क्षेत्रों में बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा डाटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिसमें जोखिम आकलन, शमन योजनाएं और आपदाओं से संबंधित वास्तविक समय का डेटा संकलित किया जाएगा। इससे भविष्य में आपदा प्रबंधन की रणनीतियों को और अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) जैसी संस्थाएं सात दिन पहले तक मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हो रही हैं। इसके साथ ही मिशन मौसम के तहत अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सात दिन पहले तक मौसम और चक्रवात की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एआई आधारित सिमुलेशन प्रणाली विकसित की जा रही है।
सरकार ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) और राष्ट्रीय आपदा शमन निधि (NDMF) के माध्यम से राज्यों को आपदा राहत के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उच्च स्तरीय समिति (HLC) राज्यों को सहायता स्वीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
गृह मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न राज्यों को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से 4576.7 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के बाद राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को गति दी जा सके।
इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और आपदा-संवेदनशील राज्यों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पूर्वानुमान और मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र के माध्यम से समय रहते चेतावनी और राहत व्यवस्था सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता की सुरक्षा और विकास के लिए ऐसे विषयों को संसद में उठाना उनकी प्राथमिकता है।