शिमला: गीता मंदिर में हिंदू सम्मेलन समिति टूटीकंडी ने आयोजित किया ‘हिन्दू संस्कृति सम्मेलन’
शिमला: गीता मंदिर में हिंदू सम्मेलन समिति टूटीकंडी ने आयोजित किया ‘हिन्दू संस्कृति सम्मेलन’
शिमला: तुलसी पूजन दिवस के अवसर पर आज शिमला के गीता मंदिर परिसर में हिंदू सम्मेलन आयोजक समिति टूटीकंडी दवारा ‘हिन्दू संस्कृति सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया। यह सम्मेलन धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना को सशक्त करने के उद्देश्य से आयोजित किया। ज़िला शिमलासह प्रचार प्रमुख रामेश्वर शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि यह महज़ एक आध्यात्मिक सभा नहीं है, बल्कि हर हिंदू के लिए एकजुट होकर धर्म की रक्षा करने का आह्वान है। अब समय आ गया है कि हम सब एक साथ खड़े हों । पहले हिंदू शब्द बोलने में संकोच होता था लेकिन आज 100 वर्षों की साधना के बाद संपूर्ण भारत गर्व से कह रहा है कि हम हिंदू हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे परिवारों में हिंदू भाव जागृत करें। हिंदू जब-जब संगठित हुआ है तब-तब परिवर्तन आया है। मनुष्य का चिंतन एवं चरित्र संस्कृति के अनुरूप ही बनता है संस्कृति में जिस प्रकार के वैचारिक मूल्यों का समावेश होगा, व्यक्ति एवं समाज का वैसा ही स्वरूप होगा। ऐसे कार्यक्रम समाज को एकजुट करते हैं और सनातन धर्म की रक्षा के संकल्प को मजबूत बनाते हैं। ऐसे आयोजनों में ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को शामिल होना चाहिए।
समिति आयोजकों ने प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान हालात में समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। नशा निवारण केंद्रीय में युवाओं की बढ़ती संख्या चिंता पैदा करने वाली है। इसके लिए समाज को जागना होगा और पुलिस व प्रशासन के साथ नशे के बढ़ते प्रचलन को रोकने के लिए आगे आना होगा। नशा निवारण केंद्रों में 21 से 30 साल के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। चिट्टे जैसे जानलेवा नशे से युवाओं को बचाना है, तो अभिभावकों को खुद आगे आना होगा।