हिम धरोहर व इतिहास (Page 2)

चामुण्डा नंदिकेश्वर धाम, (कांगड़ा) -जहाँ श्रद्धालुओं की होती है हर मनोकामना पूरी

श्री चामुण्डा नंदिकेश्वर धाम रियासतीकाल में त्रिगर्तगण (वर्तमान कांगड़ा) का उत्तरी द्वारपाल माना जाता था हिमाचल प्रदेश की धौलाधार पर्वत श्रृंखला में बसा कांगड़ा जिले का शिव–शक्ति धाम...

प्रागैतिहासिक एवं ऐतिहासिक हिमाचल; पृष्ठभूमि (भाग 1)

वर्तमान में जो राजनीतिक-सामाजिक व्यवस्था है उसे ठीक से समझने के लिए उसके अतीत अर्थात इतिहास की जानकारी आवश्यक है ‘इतिहास’ का अर्थ है ‘ऐसा ही था’ अर्थात अतीत में जो, जैसा हुआ उसका...

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

त्रिर्गत के तीन शक्तिपीठों में ज्वालाजी, वज्रेश्वरी और चिंतपूर्णी उल्लेखनीय शक्तिपीठ पहला स्थान माता वैष्णों देवी को दिया जाता है, जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है स्वर्ण कलशों से सजा...

चमत्कारों से आस्था की ज्योत जगाने वाला दियोट सिद्ध “श्री बाबा बालकनाथ मन्दिर”

आधुनिक ढंग के निर्माण शिल्प के साथ शिखरनुमा शैली में बना है मन्दिर गुफा मन्दिर में स्थापित है बाबा बालकनाथ की श्यामवर्णी संगमरमर की मूर्ति हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की धौलगिरि पर्वतश्रेणी...

हिमाचल: किन्नौर जनपद की विवाह परंपरा, शादी में न तो मंडप बनाया जाता है, और न ही अग्नि के लिए जाते हैं फेरे

सतलुज नदी किन्नौर क्षेत्र को दो भागों में बाँटती है। यहाँ का मौसम वर्षभर सुहावना रहता है। हिमाचल की इस पावन भूमि पर हिमाच्छादित पर्वत श्रेणियों से घिरा किन्नौर एक अत्यंत रमणीय क्षेत्र है।...

इतिहास: हिमाचल के कांगड़ा राज्य का राजपूती शासन काल…..

नगरकोट मन्दिर की धनराशि और वैभव से आकर्षित होकर महमूद गजनी ने 1009 ई. में कांगड़ा पर किया था आक्रमण  कटोच राजाओं के पास मौजूद वंशावली में राजाओं के नामों का वर्णन है हम आपको इस बार राजपूती शासन...

हिमाचल: रिवालसर का छेश्चू (छेत्शु) मेला व वैशाखी मेला

लोमस ऋषि ने की थी रिवालसर झील के तट पर भगवान शिव की अराधना ‘छेश्चू‘ शब्द में ‘छ‘ का भाव पानी और ‘श्चू‘ का भाव है मेला पूजा में वाद्य यन्त्रों के स्वर के साथ ‘ओम् माने पेमे हूं‘...