हिमाचल: डॉक्टरों की पेन-डाउन हड़ताल दो सप्ताह के लिए स्थगित, CM से बातचीत के बाद टकराव टला
हिमाचल: डॉक्टरों की पेन-डाउन हड़ताल दो सप्ताह के लिए स्थगित, CM से बातचीत के बाद टकराव टला
शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों की 2 नवंबर से होने वाली प्रस्तावित पेन-डाउन हड़ताल को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ हुई बैठक में मांगों पर सहमति बनने और फैकल्टी के तबादला आदेश रद्द होने के बाद राज्य चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालय शिक्षक संघ (SAMDCOT) ने यह निर्णय लिया। स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (SAMDCOT) ने सुखविंदर सिंह सुक्खू एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
SAMDCOT ने प्रेस विज्ञाप्ति के माध्यम से कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चिकित्सा शिक्षकों की वास्तविक चिंताओं को संवेदनशीलता से सुना और मेडिकल फैकल्टी कैडर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों का सकारात्मक समाधान निकाला। SAMDCOT राज्य में उत्कृष्ट रोगी देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को निरंतर सुदृढ़ करने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराता है। हालांकि एसोसिएशन सदैव जनसेवा के लिए समर्पित है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कुछ भ्रामक व अनुचित सलाहों के कारण लिए गए फैसलों के विरोध में लोकतांत्रिक असहमति आवश्यक हो गई थी। मुख्यमंत्री के त्वरित एवं व्यक्तिगत हस्तक्षेप से यह गतिरोध समाप्त हुआ और फैकल्टी सदस्यों का विश्वास पुनः बहाल हुआ। यह सहमति सचिवालय में शुक्रवार सायं 7:00 बजे आयोजित बैठक के दौरान बनी, जहाँ SAMDCOT अध्यक्ष डॉ. बलबीर एस. वर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य सचिव की उपस्थिति में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय एवं दिए गए आश्वासन: तबादला आदेशों को रद्द करना: मुख्यमंत्री ने उन सभी एसोसिएट प्रोफेसरों और प्रोफेसरों के तबादला आदेश तत्काल रद्द करने के निर्देश दिए, जिन्हें रिलीव नहीं किया गया था अथवा जिन्होंने न्यायालय का रुख नहीं किया था। इसके औपचारिक रद्दीकरण आदेश शनिवार को जारी कर दिए गए। फैकल्टी रोटेशन नीति:स्वीकृत एवं आवश्यक पदों के अनुरूप फैकल्टी के लिए 2 महीने के चक्र वाली एक पारदर्शी रोटेशन नीति लागू की जाएगी। राज्य के संस्थानों में सेवा शर्तों की एकरूपता: आईजीएमसी (IGMC), एम्स चमियाना (AIMSS Chamiana) और प्रदेश के अन्य सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एकसमान और न्यायसंगत प्रशासनिक नियम लागू होंगे: अवकाश (Vacations): सभी पदनामित सहायक प्रोफेसरों (Designated Assistant Professors) के लिए एकसमान ‘नो वैकेशन’ (no vacation) नीति। एनपीए (NPA): सभी नियमित सहायक प्रोफेसरों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) का लाभ। सीनियर रेजिडेंट नीति: सीनियर रेजिडेंट (SR) नीति में व्यापक सुधार, ताकि सभी मेडिकल कॉलेजों में एम्स चमियाना की तर्ज पर रिक्त पदों को सुचारू रूप से भरा जा सके। पीजी बॉन्ड नीति की समीक्षा: हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट-ग्रेजुएशन पूर्ण करने वाले चिकित्सकों को प्राथमिकता और करियर प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से पीजी बॉन्ड नीति की पुनर्परीक्षा की जाएगी। मुख्य संस्थागत आवश्यकताएं: एकीकृत प्रशासन एवं एनएमसी (NMC) मानकों की अनिवार्यता सरकार द्वारा उठाए गए सकारात्मक कदमों का स्वागत करते हुए, SAMDCOT ने दो प्रमुख संरचनात्मक मुद्दों को रेखांकित किया, जिन पर तत्काल नीतिगत निर्णय आवश्यक है: आईजीएमसी शिमला और एम्स चमियाना का एकीकृत प्रशासन: एम्स चमियाना प्रदेश के पहले मेडिकल कॉलेज, आईजीएमसी शिमला का ही सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक है। इसका निर्माण और वित्तीय स्वीकृति किसी स्वतंत्र अस्पताल के रूप में नहीं, बल्कि आईजीएमसी के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के तहत हुई थी। इसकी ऐतिहासिक प्रतिष्ठा, राष्ट्रीय रैंकिंग और वैधानिक वैधता बनाए रखने के लिए इसे मूल संस्थान (आईजीएमसी) के अधीन ही रहना चाहिए। वर्तमान में दोनों केंद्रों के विकास में सबसे बड़ी बाधा प्रशासनिक दोहराव है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा एम्स चमियाना को एक स्वतंत्र शिक्षण संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है; यहाँ की सभी डीएम और एमसीएच (DM/MCh) सीटें मूल संस्थान आईजीएमसी के तहत ही संचालित होती हैं। वैधानिक और व्यावहारिक रूप से, जब तक कोई संस्थान स्वतंत्र मेडिकल कॉलेज न हो, वहाँ ‘प्रिंसिपल’ का पद नहीं हो सकता। इसके सुचारू संचालन के लिए एकल प्रशासनिक ढांचा—जैसे डायरेक्टर अथवा आईजीएमसी के समन्वय में कार्यरत वाइस-प्रिंसिपल—होना अनिवार्य है। दोहरे प्रशासनिक तंत्र से विकास कार्य बाधित ही होंगे। एनएमसी दिशानिर्देशों की अनिवार्यता पर स्पष्टता: एसोसिएशन ने कुछ प्रशासनिक हलकों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क पर कड़ा ऐतराज जताया कि “स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए एनएमसी के नियम अनिवार्य नहीं हैं।” यह धारणा पूरी तरह भ्रामक और जोखिम भरी है। यद्यपि स्वास्थ्य सेवाओं का प्रशासन राज्य सूची में आता है, किंतु उच्च एवं व्यावसायिक चिकित्सा शिक्षा के मानकों का निर्धारण भारतीय संविधान की संघ सूची (सूची-I) की प्रविष्टि 66 और समवर्ती सूची के तहत आता है। इसलिए एनएमसी के वैधानिक नियम पूरे देश में बाध्यकारी हैं। एनएमसी मानकों की अनदेखी करने से राज्य में एमबीबीएस, एमडी/एमएस और सुपरस्पेशियलिटी सीटों की मान्यता पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। आंदोलन पर निर्णय:फैकल्टी तबादला आदेश रद्द होने और माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासनों के दृष्टिगत, SAMDCOT ने 2 से 4 नवंबर तक प्रस्तावित अपनी पेन-डाउन हड़ताल को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है। यह दो सप्ताह का स्थगन प्रदेश सरकार को आवश्यक औपचारिक अधिसूचनाएं जारी करने और सहमत बिंदुओं को लागू करने हेतु पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से किया गया है। इस अवधि के उपरांत एसोसिएशन प्रगति की समीक्षा करेगी।