जोगिंद्रनगर: मत्स्य निदेशक-सह-वार्डन ने किया मच्छयाल स्थित महसीर फार्म का दौरा; रणा खड्ड में 3,000 महसीर मछली को अंगुलिकाओं का किया संग्रह

मण्डी: मत्स्य निदेशक-सह-वार्डन ओम कांत ठाकुर ने आज जोगिंद्रनगर के मच्छयाल स्थित महसीर फार्म का दौरा किया तथा फार्म में चल रही महसीर मछली के प्रजनन गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस भ्रमण के दौरान सहायक निदेशक मत्स्य (बीस सूत्रीय कार्यक्रम), डॉ. सोमनाथ तथा सहायक निदेशक मत्स्य, मंडी नीतू सिंह भी उपस्थित रहे।

इस दौरान निदेशक-सह-वार्डन ने फार्म की विभिन्न सुविधाओं का जायजा लिया तथा महसीर मछली के प्रजनन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने फार्म की क्षतिग्रस्त मुख्य जलापूर्ति नहर का भी निरीक्षण किया तथा फार्म में पर्याप्त जल उपलब्धता से संबंधित समस्याओं का जायजा लिया।

ओमकांत ठाकुर ने अभियांत्रिकी विंग के अधिकारियों को फार्म के क्षतिग्रस्त पालन तालाबों तथा नए पंप हाउस के निर्माण के लिए आवश्यक प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने फार्म की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए पंप हाउस के निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के भी निर्देश दिए, ताकि फार्म की गतिविधियों के लिए पर्याप्त एवं निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने महसीर फार्म, मच्छयाल की पर्यटन क्षमता का दोहन करने पर भी बल दिया। उन्होंने सहायक निदेशक मत्स्य को निर्देश दिए कि इस फार्म में स्थित एंगलर लॉज का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पर्यटकों एवं एंगलर्स को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया जा सके और वे यहां की प्राकृतिक एवं मनोरम सुंदरता का आनंद उठा सकें।

दौरे के दौरान निदेशक-सह-वार्डन ने रणा खड्ड में लगभग 3,000 महसीर मछली को अंगुलिकाओं का संग्रहण भी किया। उन्होंने महसीर मछली के संरक्षण एवं संवर्धन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों एवं नदियों का स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त रहना जलीय जैव-विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने सहायक निदेशक मत्स्य को यह भी निर्देश दिए कि मंडल मंडी के अंतर्गत कार्यरत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को “क्लीन वाटर बॉडीज ड्राइव” में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए निर्देशित करें। साथ ही, सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र एवं मत्स्य फार्मों के आसपास स्थित नदियों, खड्डों एवं अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ रखने तथा स्थानीय लोगों में जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

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