हिमाचल: केंद्रीय वित्त मंत्री से मिले CM सुक्खू; अतिरिक्त वित्तीय सहायता व कर्ज की सीमा बढ़ाने का किया आग्रह
हिमाचल: केंद्रीय वित्त मंत्री से मिले CM सुक्खू; अतिरिक्त वित्तीय सहायता व कर्ज की सीमा बढ़ाने का किया आग्रह
शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की और उन्हें हिमाचल प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति तथा राज्य के सामने आ रही वित्तीय चुनौतियों से अवगत करवाया। उन्होंने राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान बंद हो जाने के कारण हिमाचल प्रदेश को लगभग 8,000 करोड़ रुपये के वार्षिक वित्तीय अंतर का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राजस्व घाटा अनुदान में लगातार कमी किए जाने से राज्य के वित्त पर दबाव और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, प्राकृतिक आपदाओं की अधिक संवेदनशीलता तथा बुनियादी ढांचे के निर्माण और रख-रखाव की अधिक लागत के कारण सार्वजनिक सेवाओं का संचालन एवं प्रबंधन तुलनात्मक रूप से अधिक महंगा है। मुख्यमंत्री कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार विभिन्न वित्तीय सुधारों और राजस्व बढ़ाने के उपायों के माध्यम से अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों तथा हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत आपूर्ति एवं विक्रेता भुगतान को एसएनए-स्पर्श मॉडल से छूट प्रदान करने का भी आग्रह किया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के आवंटन में वृद्धि करने तथा राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अधिक बुनियादी ढांचा लागत और विकास संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस घटक के तहत सहायता को दोगुना करने पर विचार करने का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने राज्य की उधार लेने की सीमा को वर्तमान 3 प्रतिशत से बढ़ाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश से राज्य को अपनी प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के साथ-साथ आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं और विकासात्मक प्राथमिकताओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों का आकलन राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में किया जाए तथा राज्य के व्यापक हित में केंद्र सरकार से उदार वित्तीय सहायता और आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान की जाएं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को राज्य सरकार द्वारा अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों से भी अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों की उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना, ग्रामीण परिवारों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उठाई गई मांगों पर राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं और विकासात्मक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने राज्य के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राज्य की जायज वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर विचार किया जाएगा, जिससे राज्य को अपनी विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने तथा अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।