कुल्लू: दौरे के पहले दिन राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई हमीरपुर से बलजीत सिंह संधू ने कृषि प्रसार की गतिविधियों का निरीक्षण किया जिसमें बहाव सिंचाई योजना नयरैनी में जायका (कृषि) द्वारा लगाए गए खीरे व फूलगोभी प्रदर्शन प्लॉटों का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने फसलों की वर्तमान स्थिति, पौधों की वृद्धि, फसल प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था तथा अपनाई जा रही कृषि तकनीकों का जायजा लिया।
अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर प्रदर्शन के माध्यम से प्राप्त अनुभव, फसल उत्पादन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों से होने वाले लाभों की जानकारी ली। उन्होंने फसल विविधीकरण, बेहतर फसल प्रबंधन एवं उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया तथा किसानों को फसलों की उचित देखभाल एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए। दौरे के दूसरे दिन सेवा क्षेत्र गतिविधि के अंतर्गत हैंडलूम प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी प्रशिक्षुओं से संवाद एवं बातचीत की गई। इस दौरान अधिकारियों ने प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त कौशल, प्रशिक्षण की उपयोगिता तथा हस्तशिल्प एवं हैंडलूम कार्य से जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षु द्वारा अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान सीखी हुई तकनीकों, तैयार किए जा रहे उत्पादों तथा कार्य के अनुभव के बारे में अवगत करवाया गया। अधिकारियों ने प्रशिक्षण का जायजा लेते हुए प्रशिक्षु को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने, पारंपरिक हस्तकरघा कला को बढ़ावा देने तथा कौशल के माध्यम से स्वरोजगार एवं आय के अवसर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके पश्चात अधिकारियों ने वहाव सिंचाई परियोजना अपर सेउबाग का दौरा कर वहां संचालित कृषि गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने जैविक कृषि उत्पादन की स्थिति का जायजा लिया तथा परियोजना के अंतर्गत स्थापित हल्दी प्लॉटों तथा टमाटर कि फसल का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने खेत में फसलों की वृद्धि, पौधों की स्थिति, फसल प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था तथा जैविक कृषि पद्धतियों के उपयोग का अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित किसान एवं विभागीय अधिकारियों से जैविक उत्पादन के तहत अपनाई जा रही तकनीकों, फसल की स्थिति एवं उत्पादन से संबंधित जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान हल्दी एवं टमाटर प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, उचित फसल प्रबंधन तथा जैविक पद्धतियों को अपनाने के लिए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए।













