हमीरपुर के इको विलेज में जलवायु-अनुकूल वृक्षारोपण को मिला बढ़ावा
हमीरपुर के इको विलेज में जलवायु-अनुकूल वृक्षारोपण को मिला बढ़ावा
सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीनस्थ महाविद्यालय, औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी हमीरपुर द्वारा माहभर चलाए जा रहे वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान के अंतर्गत हमीरपुर जिले के इको विलेज भलेटा कला में ‘वृक्षारोपण गतिविधियों के क्रियान्वयन एवं पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश सरकार की इको विलेज योजना के अंतर्गत पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, शिमला के सहयोग से आयोजित किया गया। महाविद्यालय वर्ष 2024 से इको विलेज भलेटा में ‘जलवायु-अनुकूल औद्यानिकी एवं वानिकी तकनीकों के संवर्धन’ विषय पर अनुसंधान परियोजना का क्रियान्वयन कर रहा है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 से 31 जुलाई तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हमीरपुर के समन्वय से चलाए जा रहे राज्यव्यापी वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता अभियान का हिस्सा था। कार्यक्रम में इको विलेज भलेटा के लगभग 75 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पर्यावरण अधिकारी सुमित ठाकुर ने प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा राज्य सरकार द्वारा मॉडल इको विलेज योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. दुष्यंत शर्मा ने किसानों को महाविद्यालय द्वारा प्रोत्साहित की जा रही जलवायु-अनुकूल औद्यानिकी एवं वानिकी तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने वृक्षारोपण के पर्यावरणीय एवं आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों से सतत आजीविका के लिए उपयुक्त वृक्ष प्रजातियों को अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय में तैयार किए गए तूनी, महोगनी, सहजन, मौसमी, अमरूद, नीम तथा मालाबार नीम के लगभग 530 गुणवत्तायुक्त पौधों का वितरण किसानों के बीच किया गया तथा उनके खेतों में रोपण भी करवाया गया। किसानों को फल एवं वन प्रजातियों के वैज्ञानिक रोपण एवं प्रबंधन की तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया गया, ताकि पौधों की बेहतर जीवितता एवं वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
ग्राम पंचायत नेरी की प्रधान रीना देवी ने जागरूकता कार्यक्रम एवं वृक्षारोपण अभियान के सफल आयोजन के लिए औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी तथा पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत ग्रामीण विकास के लिए उनके निरंतर सहयोग के प्रति आभार भी व्यक्त किया।