मछुआरे

मत्स्य जोखिम निधि से 16 प्रभावित मछुआरों को राहत का रास्ता, रूपए 1.66 लाख की सहायता की संस्तुति

बिलासपुर: प्राकृतिक आपदाओं के कारण मत्स्य उपकरणों की क्षति झेलने वाले पंजीकृत मछुआरों को समयबद्ध आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में हिमाचल प्रदेश मत्स्य विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल रूपए 1,66,600 की सहायता राशि की संस्तुति की है। यह निर्णय सोमवार को बिलासपुर में आयोजित मत्स्य जोखिम निधि समिति (फिशरीज रिस्क फंड कमेटी) की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता उप निदेशक मत्स्य चंचल ठाकुर ने की।

बैठक में बिलासपुर और पोंग डैम मत्स्य प्रभागों से प्राप्त कुल 16 मुआवजा दावों की बिंदुवार समीक्षा की गई। इनमें बिलासपुर तथा पोंग डैम के आठ-आठ मामले शामिल थे। निरीक्षण रिपोर्टों और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद समिति ने बिलासपुर के पात्र मामलों के लिए रूपए 71,600 तथा पोंग डैम के पात्र मामलों के लिए रूपए 95,000 की आर्थिक सहायता की संस्तुति की। निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद यह राशि पात्र मछुआरों को जारी की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए चंचल ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव आजीविका पर निर्भर समुदायों पर पड़ता है। ऐसे में मत्स्य जोखिम निधि योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रभावित मछुआरों को शीघ्र सामान्य स्थिति में लौटने में सहयोग देना भी है। उन्होंने कहा कि विभाग पात्र दावों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित कर रहा है ताकि राहत में अनावश्यक विलंब न हो।
बैठक में बताया गया कि हिमाचल प्रदेश मत्स्य जोखिम निधि योजना राज्य सरकार की अंशदायी कल्याणकारी योजना है। इसके तहत प्रत्येक पंजीकृत जलाशय मछुआरा प्रतिवर्ष रूपए 20 का अंशदान करता है, जबकि राज्य सरकार भी समान राशि का योगदान देती है। इस निधि का उपयोग बाढ़, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त मत्स्य उपकरणों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में किया जाता है।
योजना के अंतर्गत दो गिल नेट (80 मीटर) के लिए रूपए 2,000, एक लकड़ी की नाव के लिए रूपए 20,000, एक टेंट के लिए रूपए 5,000 तथा एक तिरपाल के लिए रूपए 2,000 की स्वीकृत मूल्यांकन राशि निर्धारित है। पात्र मामलों में आकलित क्षति के आधार पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
बैठक के दौरान वर्ष 2025-26 में योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि गत वित्त वर्ष में आयोजित दो बैठकों के माध्यम से विभिन्न मत्स्य प्रभागों के पात्र मछुआरों को सहायता की संस्तुति की गई थी। विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में प्राप्त होने वाले सभी पात्र दावों का भी त्वरित परीक्षण कर समयबद्ध राहत उपलब्ध कराई जाएगी।

बैठक में सहायक निदेशक मत्स्य डॉ. सोमनाथ, सहायक निदेशक मत्स्य बिलासपुर पंकज ठाकुर, सहायक निदेशक मत्स्य पोंग डैम संदीप कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य चंबा डॉ. राकेश कुमार तथा समिति के गैर-सरकारी सदस्य कर्तार चंद, कमल सिंह और जसवंत सिंह उपस्थित रहे।

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