दलाई लामा के 91वें जन्मदिवस पर तिब्बतन स्कूल परिसर छोटा शिमला में आयोजित हुआ भव्य समारोह

विद्यार्थी मानवीय मूल्यों को अपनाएं और नशे व सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचे – विक्रमादित्य सिंह
शिमला:
14वें दलाई लामा के 91वें जन्मदिवस के अवसर पर सोमवार को छोटा शिमला स्थित तिब्बतन स्कूल परिसर में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।

लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री ने कहा कि समाज में बढ़ते अपराध, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा तथा युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के गलत और गैर-जिम्मेदाराना उपयोग के कारण समाज में अनेक नकारात्मक प्रवृत्तियां जन्म ले रही हैं, जिनका दुष्प्रभाव आज पूरे देश और हिमाचल प्रदेश में देखने को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय ही वह स्थान है जहां बच्चों के व्यक्तित्व, सोच और जीवन मूल्यों की नींव रखी जाती है। इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों, साइबर जागरूकता तथा नैतिक मूल्यों के प्रति समय-समय पर जागरूक करें। उन्होंने विद्यालय प्रशासन से विद्यार्थियों के बीच नियमित जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया ताकि वह सही और गलत में अंतर समझ सकें।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश में रासायनिक नशे, शराब तथा अन्य मादक पदार्थों का बढ़ता प्रचलन युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने हाल ही में शिमला के एक विद्यालय में हुई गोलीबारी की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं और इनसे सबक लेते हुए युवाओं को सही दिशा देना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि विकास केवल सड़कों, भवनों, पर्यटन और आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक विकास को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। आज यह समझना आवश्यक है कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है और वह किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। यदि उनके मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय मूल्यों की अनदेखी की गई तो भौतिक विकास के बावजूद समाज मानवीय संवेदनाओं से रिक्त हो जाएगा।
लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए सड़कों और आधारभूत ढांचे का निर्माण आवश्यक है, लेकिन यह विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई जनहानि, घरों का क्षतिग्रस्त होना तथा अनेक परिवारों का विस्थापन केवल प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थित विकास प्रक्रिया और पर्यावरणीय असंतुलन भी एक प्रमुख कारण है। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर से ही पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र और वनों के महत्व के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश का लगभग 78 प्रतिशत भू-भाग वन भूमि के अंतर्गत आता है, किंतु वास्तविक वन आच्छादन लगभग 35 से 36 प्रतिशत ही है। ऐसे में अधिक से अधिक पौधारोपण कर वन संपदा को समृद्ध बनाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि ने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया और हेपेटाइटिस-बी स्क्रीनिंग अभियान का शुभारंभ किया।

कैबिनेट मंत्री ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करने वाले दलों को 31 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों एवं विभिन्न तिब्बती शिविरों के कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। मुख्यातिथि को टाॅपी, खतक और थंका पेंटिग देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विशेष अतिथि को भी सम्मानित किया गया।
समारोह में तिब्बती समुदाय के प्रतिनिधियों, विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों, विद्यार्थियों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया।    

दलाईलामा की वजह से हिमाचल को मिली दुनिया में अलग पहचान
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विश्व के अनेक देशों के वर्तमान एवं पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, नीति-निर्माता, अंतरराष्ट्रीय हस्तियां तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व नियमित रूप से धर्मशाला पहुंचकर दलाई लामा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा उनके करुणा और मानवता के मार्ग से प्रेरणा लेते हैं। यह हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। इस वजह से आज हिमाचल को दुनिया भर में दलाईलामा के कारण अलग पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा दलाई लामा को भारत में शरण प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय मानवता और भारतीय संस्कृति की उदार परंपरा का प्रतीक है। निर्वासन के बाद धर्मशाला को अपना निवास बनाने के साथ ही यह नगर आज विश्वभर में लिटिल ल्हासा के नाम से भी जाना जाता है।
उन्होंने अपने पिता एवं हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह और दलाई लामा के बीच रहे विशेष आत्मीय संबंधों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका परिवार स्वयं को सौभाग्यशाली मानता है कि वर्ष 2017 में धर्मशाला में स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह की जीवनी का लोकार्पण दलाई लामा के करकमलों द्वारा किया गया था। उस अवसर पर उपस्थित रहना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि हमें दलाईलामा के बताए मार्गों पर चलते हुए मानवता के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।  
दलाई लामा का जन्मदिन केक काटकर मनाया
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ। इसके उपरांत दलाई लामा के चित्र का गोल्डन थ्रोन पर स्वागत किया गया तथा तिब्बती शहीदों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में तिब्बती एवं भारतीय राष्ट्रगान के साथ विद्यार्थियों ने जन्मदिवस गीत प्रस्तुत किया। तिब्बती समुदाय के प्रतिनिधियों ने परम पावन दलाई लामा के चित्र पर पारंपरिक धार्मिक अर्पण किए तथा सम्मान स्वरूप खतक भेंट किए। समारोह के दौरान तिब्बती प्रशासन तथा तिब्बती संसद-इन-एक्साइल के संदेशों का वाचन किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं जन्मदिवस केक काटकर परम पावन दलाई लामा की दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की गई। तिब्बती समुदाय की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया।

विशिष्ट अतिथि के तौर पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परम पावन दलाई लामा का स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन उनके परिवार के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने सभी लोगों से आह्वान किया कि वह दलाई लामा के करुणा, अहिंसा, शांति, सहिष्णुता और मानवता के संदेश को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लें।

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