प्रधानमंत्री मोदी ने एसजेवीएन की 1000 मेगावाट बीकानेर सौर विद्युत परियोजना का किया उद्घाटन

िमला: धानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज राजस्थान के पचपदरा में एसजेवीएन की 1000 मेगावाट बीकानेर सौर विद्युत परियोजना का उद्घाटन किया। यह भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा स्वच्छ ऊर्जा एवं सततशील विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दोहराती है। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े,राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय विद्युत तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री,श्री मनोहर लाल, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी, विधि और न्याय  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार),संसदीय कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार श्री अर्जुन राम मेघवाल, उप मुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी,उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद वैरवा, तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन भूपेंद्र गुप्ता, निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा, निदेशक (वित्त) पार्थजीत डे, निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल, पंकज पोरवाल मुख्य सतर्कता अधिकारी, सीईओ, एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एसजीईएल) प्रशांत शर्मा तथा एसजेवीएन एवं एसजीईएल के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

एसजेवीएन ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा अधीनस्थ कंपनी, एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एसजीईएल) के माध्यम से राजस्थान के बीकानेर में 1000 मेगावाट बीकानेर सौर विद्युत परियोजना का विकास किया है। लगभग 5,000 एकड़ भूमि में फैली इस परियोजना का विकास लगभग ₹5,492 करोड़ के निवेश से किया गया है। यह एकल स्थान पर घरेलू सामग्री आवश्यकता (डीसीआर) श्रेणी के अंतर्गत भारत की सबसे बड़ी एकल ईपीसी सौर परियोजना है, जो स्वदेशी क्षमताओं पर आधारित विश्वस्तरीय नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। इस परियोजना से प्रचालन के प्रथम वर्ष में लगभग 2,454.84 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन तथा इसकी 25 वर्ष की प्रचालन अवधि के दौरान लगभग 56,482.14 मिलि यन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन होने की संभावना है। उत्पादित विद्युत की आपूर्ति राजस्थान (500 मेगावाट), उत्तराखंड (200 मेगावाट) तथा जम्मू-कश्मीर (300 मेगावाट) राज्यों को की जाएगी, जिससे देश के स्वच्छ ऊर्जा नेटवर्क को सुदृढ़ करने के साथ-साथ दीर्घकालिक एवं सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

अनुमान है कि यह परियोजना अपनी प्रचालन अवधि के दौरान लगभग 2.79  बिलियन किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में न्यूनता लाएगी, जिससे भारत की जलवायु कार्रवाई संबंधी प्रतिबद्धताओं एवं पर्यावरणीय सततशीलता के उद्देश्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

यह परियोजना भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों को विशेष रूप से बढ़ावा देती है।  परियोजना में लगभग 24.22 लाख स्वदेशी रूप से निर्मित डीसीआर सौर मॉड्यूल तथा लगभग 175 करोड़ स्वदेशी सौर सेल का उपयोग किया गया है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला है तथा स्वदेशी नवीकरणीय ऊर्जा इको-तंत्र को सुदृढ़ता हासिल हुई है। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के अतिरिक्त, इस परियोजना ने क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके निर्माण एवं कमीशनिंग चरणों के दौरान 2,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित हुए तथा परियोजना अपने प्रचालन चरण में भी आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रही है। परियोजना ने सड़क, ट्रांसमिशन प्रणाली तथा अन्य संबद्ध सुविधाओं सहित महत्वपूर्ण अवसंरचना के विकास को भी प्रोत्साहित किया है, जिससे बीकानेर क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिली है।

भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एसजेवीएन की वर्तमान स्थापित क्षमता 4,196.5 मेगावाट है तथा कंपनी 123 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली दो ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन कर रही है। 1000 मेगावाट बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना की सफल कमीशनिंग एवं उद्घाटन भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार तथा सततशील एवं ऊर्जा-सुरक्षित भविष्य के राष्ट्रीय पोर्टफोलियों को साकार करने के प्रति एसजेवीएन की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करता है।

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