प्रदर्शन आधारित कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर दिया बल

शिमला: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)–अटारी, जोन-1, लुधियाना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. परविंदर शीरॉन ने अपने किन्नौर दौरे के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), किन्नौर की विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा की। कृषि विज्ञान केंद्र, किन्नौर का संचालन डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी द्वारा आईसीएआर के वित्तीय सहयोग से किया जा रहा है।

दौरे के दौरान डॉ. शीरॉन ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित प्रसार, अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की तथा जनजातीय क्षेत्र में कृषि विकास को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न गतिविधियों के क्रियान्वयन एवं प्रगति पर वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के साथ चर्चा की। केवीके की प्रमुख डॉ. नीना चौहान के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने उन्हें केंद्र की उपलब्धियों, चल रहे प्रदर्शन कार्यक्रमों तथा भविष्य की कार्य योजनाओं की जानकारी दी।

डॉ. शीरॉन ने कृषि विज्ञान केंद्र के प्रदर्शन फार्म, सब्जी अनुसंधान केंद्र, कल्पा तथा रिकांगपिओ स्थित किसान भवन का भी निरीक्षण किया। सब्जी अनुसंधान केंद्र, कल्पा में उन्होंने उच्च घनत्व सेब बागवानी (हाई-डेंसिटी एप्पल प्लांटेशन) तथा मूली, शलजम एवं आलू के बीज उत्पादन से संबंधित प्रदर्शन परीक्षणों का अवलोकन किया। केंद्र के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कल्पा फार्म को कृषि शिक्षा के साथ-साथ सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ईको-टूरिज्म की दृष्टि से विकसित करने की सिफारिश की। इसके अतिरिक्त उन्होंने अनुसंधान एवं प्रदर्शन गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए फार्म में समशीतोष्ण फल फसलों की अधिक किस्मों को शामिल करने का भी सुझाव दिया।

इस दौरे का दौरान चितकुल में खेती बचाओ अभियान के अंतर्गत आयोजित किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम रहा, जिसमें डॉ. शीरॉन ने किसानों के साथ आधुनिक कृषि एवं बागवानी तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की। किसानों ने गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी तथा मटर की पारंपरिक बुवाई पद्धतियों पर निर्भरता को उत्पादकता में कमी का प्रमुख कारण बताया।

इन समस्याओं के समाधान के लिए डॉ. शीरॉन ने किसानों के खेतों पर गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के माध्यम से अधिक से अधिक प्रदर्शन इकाइयां स्थापित करने पर बल दिया, ताकि किसान उन्नत उत्पादन तकनीकों के लाभों को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र को जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के वितरण का प्रावधान रखते हुए उपयुक्त परियोजनाएँ तैयार कर प्रस्तुत करने की भी सलाह दी, जिससे जनजातीय किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा उनकी आजीविका को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिल सके।

डॉ. शीरॉन ने 3,450 मीटर की ऊँचाई पर स्थित मस्तरंग में सीडलिंग रूटस्टॉक पर आधारित उच्च घनत्व सेब बागवानी के प्रदर्शन परीक्षण का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कठिन कृषि-जलवायु परिस्थितियों में इस प्रदर्शन की प्रगति एवं प्रदर्शन का मूल्यांकन किया तथा जिले भर में किसानों के खेतों पर ऐसे और अधिक प्रदर्शन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उच्च घनत्व सेब बागवानी एवं अन्य हाई-टेक बागवानी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।

दौरे के दौरान एक माह तक चलाए गए ‘खेती बचाओ अभियान’ की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। इस अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र की टीम ने किन्नौर जिले के तीनों विकास खंडों में व्यापक प्रशिक्षण एवं प्रसार गतिविधियाँ आयोजित कीं। अभियान के दौरान केवीके कर्मियों ने 31 पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 70 गाँवों का भ्रमण कर किसानों को नवीनतम कृषि एवं बागवानी तकनीकों, समेकित फसल प्रबंधन, उन्नत उत्पादन तकनीकों तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों की जानकारी प्रदान की, जिससे जनजातीय क्षेत्र में कृषि की उत्पादकता एवं स्थिरता को बढ़ावा मिल सके।

इस दौरे  के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र की प्रमुख डॉ. नीना चौहान, डॉ. डी.पी. भंडारी, डॉ. अरुण नेगी, डॉ. बी.आर. नेगी, डॉ. दीपिका नेगी सहित कृषि विज्ञान केंद्र तथा क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, शारबो के तकनीकी एवं फील्ड स्टाफ भी उपस्थित रहे।

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