निर्यातकों की समस्याओं के समाधान पर बनेगी रणनीति, समन्वित प्रयासों से मंडी को निर्यात हब के रूप में स्थापित करेंगे : डॉ मदन कुमार
मण्डी : जिला मंडी को निर्यात हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला निर्यात संवर्धन समिति (डीईपीसी) ने जिला निर्यात कार्ययोजना (डीईएपी) को अंतिम रूप दे दिया है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ मदन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिले की निर्यात क्षमता, फोकस क्षेत्रों तथा निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिला निर्यात कार्ययोजना को फार्मास्यूटिकल्स, कृषि एवं कृषि आधारित उत्पादों (फल वाइन सहित), सुगंधित पौधों, हथकरघा एवं हस्तशिल्प तथा पर्यटन एवं संबद्ध सेवाओं पर केंद्रित किया जाएगा। हथकरघा एवं हस्तशिल्प श्रेणी में शॉल, काष्ठ शिल्प, नक्काशी तथा धातु शिल्प को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जबकि फ्लोरीकल्चर को फोकस क्षेत्र में शामिल नहीं करने का निर्णय लिया गया।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ मदन कुमार ने कहा कि जिला मंडी में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं और सभी विभागों तथा उद्यमियों के समन्वित प्रयासों से इन संभावनाओं को साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिला निर्यात कार्ययोजना के माध्यम से मंडी को एक सशक्त निर्यात हब के रूप में स्थापित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में ऑनलाइन जुड़े डीजीएफटी लुधियाना के संयुक्त महानिदेशक यू.के. आचार्य ने विदेश व्यापार नीति-2023 के तहत डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब पहल पर चर्चा करते हुए आयात-निर्यात कोड (आईईसी), सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन, मुक्त व्यापार समझौतों और निर्यात संवर्धन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईईसी अब ऑनलाइन और नाममात्र शुल्क पर 24 घंटे के भीतर प्राप्त किया जा सकता है।
बैठक में बागवानी विभाग, जिला उद्योग केंद्र, अग्रणी जिला प्रबंधक, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, हिमक्राफ्ट के प्रतिनिधियों तथा जिले के अनेक निर्यातकों और औद्योगिक इकाइयों ने भाग लिया। वहीं डीजीएफटी लुधियाना, एफआईईओ, टेक्सप्रोसिल तथा एमएसएमई-डीएफओ सोलन के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।