जब शिक्षक कागज़ों में उलझ जाएगा, तब कक्षा में ज्ञान कौन पहुंचाएगा ! – डॉ. जनक
जब शिक्षक कागज़ों में उलझ जाएगा, तब कक्षा में ज्ञान कौन पहुंचाएगा ! – डॉ. जनक
चंबा: जिला चंबा में पांगी भरमौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि चंबा जैसे दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले जिले में विद्यालय समय के बाद अध्यापकों से जनगणना का कार्य करवाना न तो व्यावहारिक प्रतीत होता है और न ही न्यायसंगत। जिले के अनेक स्कूल ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहां पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता है। खराब सड़कें, कठिन पहाड़ी रास्ते और आगामी बरसात का मौसम इस चुनौती को कई गुना बढ़ा देंगे। ऐसे में पूरे दिन शिक्षण कार्य करने के बाद अध्यापकों से अतिरिक्त जनगणना दायित्व निभाने की अपेक्षा करना उनके ऊपर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है। डॉ, जनक ने कहा कि शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य निर्माता हैं। यदि उनका अधिकांश समय और ऊर्जा गैर-शैक्षणिक कार्यों में खर्च होगी तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा परिणामों और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा।सरकार को यह भी समझना होगा कि लगातार बढ़ते अतिरिक्त कार्यों से अध्यापकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक थका हुआ शिक्षक न तो स्वयं प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है और न ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकता है।हमारा स्पष्ट सुझाव है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए बेरोजगार शिक्षित युवाओं, आउटसोर्स कर्मियों या विशेष रूप से नियुक्त गणनाकारों की सेवाएं ली जाएं। इससे हजारों युवाओं को रोजगार और अनुभव मिलेगा, जबकि विद्यालयों में पढ़ाई भी निर्बाध रूप से चलती रहेगी।जनगणना राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन शिक्षा राष्ट्र के भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र के लिए दोनों आवश्यक हैं, इसलिए सरकार को ऐसा संतुलित समाधान निकालना चाहिए जिससे न जनगणना प्रभावित हो और न ही बच्चों की शिक्षा।शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से मुक्त करिए, ताकि वे पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ बच्चों का भविष्य संवार सकें।स्कूलों में बुरे हाल हैपहले इलेक्शन में व्यस्त रहेफिर ट्रेनिंगअब जनगणना हिमाचल में सरकारी स्कूलों की पढ़ाई सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रभावित हो रही हैं।