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कमज़ोर वर्गों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिये प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध

फीचर

प्रदेश सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्गों, अल्पसंख्यक समुदायों का सामाजिक व आर्थिक उत्थान सुनिश्चित बनाने के उददेश्य से अनेक कल्याणकारी योजनाएं एवं कार्यक्रम कार्यान्वित किए जा रहे हैं, ताकि इन वर्गों के लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें उन्नति के समान अवसर उपलब्ध करवाएं जा सकें। प्रदेश सरकार द्वारा गद्दी, गुज्जर, गोरखा तथा लबाणा कल्याण बोर्डों का गठन किया गया है ताकि इन समुदायों का तीव्र विकास सुनिश्चित हो सके। इन समुदायों के लिए आरम्भ की गई योजनाओं का बेहतर कार्यान्वयन सुनिश्चित हो और सही मायनों में सरकार का सर्वकल्याण का लक्ष्य पूरा हो सके। कल्याण योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए वार्षिक आय सीमा को 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया गया है ताकि अधिक से अधिक पात्र व्यक्ति सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। वृद्धजनों, विधवाओं तथा शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को आर्थिक व सामाजिक रूप से संबल प्रदान करने के उददेश्य से राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजना का प्रभावी कायान्वयन किया जा रहा है। योजना के तहत पात्र व्यक्तियों की सामाजिक सुरक्षा पैंशन को गत 45 महीनों के दौरान 450 रुपये से बढ़ाकर 650 रुपये किया गया हैं

80 वर्ष व इससे अधिक आयुवर्ग तथा 70 प्रतिशत से अधिक अक्षमता वाले व्यक्तियों को 1200 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जा रही है। वर्तमान में राज्य में 3,63,921 पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जा रही है जिसके लिए वर्ष 2016-17 में 35768.47 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जात/जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों जिनके नाम राजस्व रिकार्ड में मकान बनाने के लिए भूमि उपलब्ध है, को नये गृह निर्माण के लिए 75,000 रुपये की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। इसके अलावा पुराने मकान की मुरम्मत के लिए 25,000 रुपये प्रदान किए जा रहें। योजना के तहत वर्ष 2016-17 में 3167 आवासों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए 2368.00 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। गत साढ़े तीन वर्षों में इस योजना के तहत 13241 गृह निर्माण किया गया।

समाज में छुआछूत की कुप्रथा को दूर करने के उददेश्य से अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सामान्य जाति के ऐसे युवक/युवती जिन्होंने अनुसूचित जाति की युवक/युवती से विवाह किया है को 50 हजार रुपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। योजना के तहत इस वर्ष 183 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। योजना के अंतर्गत गत साढ़े तीन वर्षों में 1400 से अधिक व्यक्तियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए राज्य में ‘मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम योजना’ लागू की गई है। योजना के तहत प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों प्रत्येक में से दो ऐसे गांवों का चयन किया जाता है जहां पर अनुसूचित जाति की जनसंख्या 40 प्रतिशत या इससे अधिक व कुल संख्या 200 या इससे अधिक है। योजना के तहत चयनित गांव को सड़क निर्माण के लिए 10 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। योजना के तहत वर्ष 2016-17 में 1165 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों के युवाओं अथवा जिनकी वार्षिक आय 60 हजार रुपये से कम है, को विभिन्न कंप्यूटर पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए 1200 रुपये प्रतिमाह प्रशिक्षण शुल्क प्रदान कर रही है। इसके अतिरिक्त, प्रशिक्षण के दौरान एक हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृति भी प्रदान की जा रही है। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर सफल उम्मीदवारों को 6 माह के लिए सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्थानों में कंप्यूटर एप्लीकेशन में प्रवीणता प्राप्त करने के लिए तैनाती दी जाती है और इस अवधि के दौरान उन्हें 1500 रुपये प्रतिमाह छात्रवृति भी प्रदान की जा रही है। गत साढ़े तीन वर्षां में 937.51 लाख रुपये व्यय किए गए हैं तथा इस वित्त वर्ष के दौरान 533 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय 35 हजार से कम है और जिन्होंने आईटीआई या किसी अन्य प्रशिक्षण केन्द्र से प्रशिक्षण प्राप्त किया है, को स्वावलंबी बनाने के लिए राज्य सरकार उन्हें सिलाई मशीन व अन्य उपकरण खरीदने के लिए 1800 रुपये का अनुदान प्रदान कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत 45 महीनों में 19 हजार व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया। कार्यक्रम के तहत इस वर्ष 7472 व्यक्तियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रदेश सरकार द्वारा आरम्भ किए गए कार्यक्रमों व योजनाओं के सकारात्मक परिणाम आने शुरू हो गए हैं और लोगों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है।

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