सोलन: नौणी विश्वविद्यालय में स्थापित हुआ जनगणना डेटा अनुसंधान कार्यस्थल
सोलन: नौणी विश्वविद्यालय में स्थापित हुआ जनगणना डेटा अनुसंधान कार्यस्थल
जनगणना संचालन निदेशालय के साथ एमओयू हस्ताक्षरित
सोलन: डेटा आधारित अनुसंधान एवं नीतिगत विश्लेषण को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी तथा हिमाचल प्रदेश जनगणना संचालन निदेशालय के बीच आज विश्वविद्यालय परिसर में जनगणना डेटा अनुसंधान कार्यस्थल की स्थापना हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौता पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल तथा हिमाचल प्रदेश की जनगणना संचालन निदेशक दीपशिखा शर्मा ने हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर समारोह के उपरांत विश्वविद्यालय में जनगणना डेटा अनुसंधान कार्यस्थल का उद्घाटन भी किया गया। इस उपलब्धि के साथ विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश का पहला संस्थान बन गया है, जहां इस प्रकार का अनुसंधान कार्यस्थल स्थापित किया गया है।
इस अवसर पर दीपशिखा शर्मा ने कहा कि नवस्थापित कार्यस्थल योग्य शोधकर्ताओं को सुरक्षित रूप से गुमनाम (अनामिक) जनगणना माइक्रो-डेटा तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे वे उन्नत जनसांख्यिकीय एवं सामाजिक-आर्थिक अनुसंधान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि शोधकर्ता इस डेटा के माध्यम से क्रॉस-टैबुलेशन एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन कर सकेंगे, जिससे विशेष अकादमिक अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के नए आयाम खुलेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल विश्वविद्यालय के शोधार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी पात्र शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी।
जनगणना संचालन निदेशालय का आभार व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि यह पहल अनुसंधान एवं सार्वजनिक ज्ञान प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यस्थल शोधकर्ताओं को प्रामाणिक राष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर प्रभावशाली अनुसंधान करने में सक्षम बनाएगा।
प्रो. चंदेल ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान के महत्व पर बल देते हुए शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जनगणना माइक्रो-डेटा के माध्यम से उपलब्ध अवसरों का पूर्ण उपयोग कर सार्थक अकादमिक एवं नीति-उन्मुख अध्ययन करें।
इससे पूर्व डॉ. सुधीर वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया तथा जनसमूह को इस सुविधा के उद्देश्यों एवं महत्व की जानकारी दी। नवस्थापित कार्यस्थल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि शोधकर्ताओं को सुरक्षित रूप से गुमनाम रिकॉर्ड-स्तरीय जनगणना डेटा उपलब्ध करवाया जा सके, जिससे गहन जनसांख्यिकीय एवं सामाजिक-आर्थिक अध्ययन किए जा सकें तथा ऐसे आंकड़ों तक पहुंच संभव हो सके जो सामान्यतः सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होते।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी वैधानिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य तथा जनगणना संचालन निदेशालय के अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें संयुक्त निदेशक पंकज कुमार सिन्हा एवं आशीष चौहान, सहायक निदेशक प्रमोद मिश्रा, भानु पांडेय तथा करण बोरा शामिल रहे।