डॉक्टर हैं पर टेक्निकल स्टाफ नहीं, मशीनें हैं पर संचालन नहीं- स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट में – विपिन परमार

शिमला: भाजपा नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने विधानसभा में मांग संख्या 9 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य बजट, नीतियों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का आकलन उसके बजट से होता है, लेकिन इस बार का स्वास्थ्य बजट मात्र 5.83% रखा गया है, जो लगभग ₹2800–3000 करोड़ के आसपास है। उन्होंने इसे अपर्याप्त बताते हुए कहा कि बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार के पास उन योजनाओं के लिए ठोस वित्तीय आधार ही नहीं है।

परमार ने कहा कि सरकार हाई-एंड तकनीक जैसे रोबोटिक सर्जरी और PET स्कैन की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि “डॉक्टर हैं, लेकिन ऑपरेशन थिएटर नहीं; मशीनें हैं, लेकिन टेक्निशियन नहीं”—यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट और परफ्यूजनिस्ट की भारी कमी है, जिसके कारण कई जगहों पर सर्जरी तक प्रभावित हो रही है। कई अस्पतालों में CT स्कैन मशीनें होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट और टेक्निकल स्टाफ के अभाव में वे बेकार पड़ी हैं।

विपिन परमार ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में पर्याप्त भर्ती नहीं हुई, जिससे स्थिति और बिगड़ी है। उन्होंने आर्थिक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में 835 स्वास्थ्य संस्थानों और 16,699 बेड के बावजूद आवश्यक स्टाफ की भारी कमी है।

उन्होंने हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं का समर्थन करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को लाभ मिला है—हार्ट सर्जरी, कैंसर उपचार, डायलिसिस, ट्रांसप्लांट और प्रसूति सेवाएं तक संभव हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन योजनाओं को बदनाम कर बंद करने की साजिश रची जा रही है।

परमार ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों पर ₹400 करोड़ से अधिक की देनदारियां लंबित हैं, जिसके कारण वेंडर्स ने सप्लाई बंद कर दी है और कई जगहों पर उपचार सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि आर्थिक सर्वे के अनुसार प्रदेश के लोगों को लगभग 14.48% स्वास्थ्य खर्च अपनी जेब से करना पड़ रहा है, जो चिंताजनक है।

रोबोटिक सर्जरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ₹28 करोड़ की मशीनों की खरीद में पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि टेंडर प्रक्रिया में कितनी कंपनियों ने भाग लिया और क्या अन्य सस्ती व प्रभावी विकल्पों पर विचार किया गया।

उन्होंने दवाइयों की गुणवत्ता पर भी गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में दवाइयों के सैंपल फेल होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने ड्रग कंट्रोल विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की।

विपिन परमार ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दिखावटी योजनाओं के बजाय बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है—डॉक्टरों, टेक्निकल स्टाफ, उपकरणों और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।

अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्राथमिकताओं को सही दिशा में तय करे, ताकि प्रदेश की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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