सुरेश कश्यप बोले- भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता चरम पर, कांग्रेस सरकार पूरी तरह बेनकाब

शिमला: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने हिमाचल प्रदेश में सामने आ रहे गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों और प्रशासनिक अराजकता पर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश आज कुशासन, भ्रष्टाचार और सत्ता-संरक्षित तंत्र के दौर से गुजर रहा है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में न तो जनता के धन की सुरक्षा हो पा रही है और न ही प्रशासनिक मर्यादा और अनुशासन कायम रह पा रहा है।

सुरेश कश्यप ने कहा कि जल शक्ति विभाग में वर्ष 2024–25 के दौरान ₹36.77 करोड़ की लागत से 4,770 मीट्रिक टन जीआई पाइप की खरीद में जिस तरह की गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, वे कांग्रेस सरकार की कथित पारदर्शिता की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरी आपूर्ति प्रक्रिया में निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन हुआ। सामग्री की तौल, डिस्पैच और ट्रांसशिपमेंट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि की मौजूदगी में होना अनिवार्य था, लेकिन न तो प्रतिनिधि की उपस्थिति दर्ज है और न ही वीडियोग्राफी अथवा अन्य वैधानिक प्रमाण उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि 12.550 मीट्रिक टन और 13.150 मीट्रिक टन जीआई पाइप की आपूर्ति में फर्जी ई-वे बिल, संदिग्ध ट्रांसशिपमेंट और नियमों की अनदेखी की गई। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत, दस्तावेजों की हेराफेरी और बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। भाजपा सांसद ने सवाल उठाया कि जब इतने गंभीर तथ्य सरकार की स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट में दर्ज हैं, तो अब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

कार्रवाई नहीं, केवल दिखावटी कदम: सुरेश कश्यप ने कहा कि दबाव में आकर विभाग द्वारा कंपनी की लगभग ₹22 करोड़ की पेमेंट रोकना कोई बड़ी कार्रवाई नहीं है। असली सवाल यह है कि इस पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कब कार्रवाई होगी। यदि भाजपा इस मुद्दे को लगातार न उठाती, तो यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबा दिया जाता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती और बचाव की राजनीति कर रही है।

प्रशासनिक अराजकता और बेलगाम बयानबाजी: भाजपा सांसद ने कहा कि भ्रष्टाचार के साथ-साथ प्रदेश में प्रशासनिक अनुशासन भी पूरी तरह ढह चुका है। हाल के दिनों में सत्ता के संरक्षण में दिए जा रहे विवादित बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कुछ अधिकारी और मंत्री स्वयं को संविधान, सेवा नियमों और मर्यादा से ऊपर समझने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है, जहां हमेशा प्रशासन ने निष्पक्षता, संतुलन और सेवा भाव के साथ काम किया है, लेकिन कांग्रेस शासन में क्षेत्रीय भावनाएं भड़काने, समाज को बांटने और प्रशासन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिशें हो रही हैं, जो प्रदेश के लिए अत्यंत घातक हैं।

मुख्यमंत्री की चुप्पी सबसे बड़ा प्रश्न: सुरेश कश्यप ने कहा कि इन दोनों गंभीर मुद्दों—भ्रष्टाचार और प्रशासनिक बेलगामपन—पर मुख्यमंत्री की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। या तो मुख्यमंत्री इन घटनाओं से सहमत हैं, या फिर उनका सरकार और प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं बचा है। दोनों ही स्थितियां लोकतंत्र, संविधान और हिमाचल के हित में नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि जब जल शक्ति विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में करोड़ों का घोटाला सामने आए और प्रशासनिक स्तर पर अनुशासनहीनता बढ़े, तब मुख्यमंत्री का मौन रहना सीधी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है।

भाजपा करेगी हर स्तर पर संघर्ष: भाजपा सांसद ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश की जनता के धन, प्रशासनिक गरिमा और प्रदेश की अस्मिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। भाजपा इन मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक और न्यायिक मंचों तक उठाएगी।

उन्होंने मांग की कि— पाइप खरीद घोटाले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए

दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो

प्रशासनिक मर्यादा भंग करने वाले बयानों और कृत्यों पर तत्काल जवाबदेही तय की जाए

सुरेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, भाजपा हिमाचल में भ्रष्टाचार, अराजकता और कुशासन को उजागर करती रहेगी और जनता के हितों की आवाज पूरी मजबूती से बुलंद करेगी।

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