गरीबों की राहत पर कांग्रेस का आहत होना पुरानी आदत – अनुराग ठाकुर
गरीबों की राहत पर कांग्रेस का आहत होना पुरानी आदत – अनुराग ठाकुर
हमीरपुर : पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर के होटल हमीर में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान विकसित भारत, गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी ‘जी राम जी’ को लेकर कहा कि इस योजना को लाने के पीछे की मंशा गरीब कल्याण की इस योजना को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना, फर्जी जॉब कार्ड के सहारे गरीबों के हक़ के पैसे का जो बंदरबाँट हो रहा था, उस हकमारी को पूरी तरह से समाप्त करना था। मगर यह विडंबना ही है कि गरीबों को जब कभी राहत मिलती है कांग्रेस आहत हो जाती है। प्रेस वार्ता के बाद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने जनसमस्याओं की सुनवाई कर आमजनों की कई समस्याओं का मौके पर निस्तारण भी किया।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने मनरेगा में मूलभूत सुधार लाने व मनरेगा के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 लेकर आई। यह नया कानून न केवल ग्रामीण परिवारों को अधिक दिनों के रोजगार की गारंटी देता है, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी यह सहायक होगा। इस विधेयक को लाने के पीछे की मंशा बिल्कुल साफ थी, हमारा उद्देश्य है गरीब कल्याण की इस योजना को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना, फर्जी जॉब कार्ड के सहारे गरीबों के हक़ के पैसे का जो बंदरबाँट हो रहा था, उस हकमारी को पूरी तरह से समाप्त करना। जी-राम-जी का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही बिखरी हुई व्यवस्था और नीतिगत गतिरोध को समाप्त करना है। यह बिल पुराने बिखरे हुए नियमों को निरस्त कर उनकी जगह लाइसेंसिंग, सुरक्षा एप्रूवल, जवाबदेही और मुआवजे को कवर करने वाला एक फ्रेमवर्क लागू करता है। कांग्रेस के इतिहास पर नजर डालिए। कांग्रेस केवल नाम बदलने में लगी रही। कोविड के समय मजदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मोदी सरकार ने अपने सारे खजाने खोल दिए थे। हमने MGNREGA में 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च हमने मनरेगा में किया था, जो कांग्रेस कभी सोच भी नहीं सकती थी। कांग्रेस के समय लोगों को पैसा नहीं मिलता था, बिचौलिए खा जाते थे। हमने जियोटैग करने का काम शुरू किया। बैंक खाते खुलवाकर लोगों के खातों में पैसा डालने का काम हमने किया। इनके समय कहते थे कि 15 दिन में पैसा मिलेगा। कई-कई महीने तक पैसा नहीं मिलता था। हमने उसको वीकली करने का नाम किया। यही नहीं इसका बजट भी पहले से ज्यादा हो, राज्य सरकारों की भूमिका हो, वो भी हमने किया, जिससे स्कीम का विस्तार किया जा सके”
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025 सिर्फ रोजगार योजना नहीं, बल्कि रोजगार और आजीविका मिशन के तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को और गति देने वाली योजना बनेगी। इससे ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा और मजबूत होगी और गांवों में खपत बढ़ेगी। नए कानून की प्रमुख विशेषता यह है कि ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी, जो मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों से 25 दिन अधिक है। पुराने कानून में मज़दूरों को 15 दिनों के अंदर मजदूरी देने की बात थी ।अब नए कानून में एक सप्ताह के अन्दर मजदूरी देना जरुरी होगा, और अगर किसी कारण से तय समय सीमा के अंदर मजदूरों को कम के बदले मजदूरी नहीं मिलती है तो उन्हें इंटरेस्ट के साथ पैसे मिलेंगें। अगर मजदूरों को काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो ऐसी हालत में वह unemployment allowance के हकदार होंगें। भारत के गांवों को और अधिक अधिकार मिले, पंचायत अपना भविष्य तय करे यही तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के ग्राम स्वराज्य का दर्शन है और जीराम जी के मूल में गांधी जी के यही मूल्य समाहित हैं”
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “रोजगार गारंटी जैसी योजना तो 80 के दशक से चल रही है। कांग्रेस ने पहले 1989 में इसका नाम जवाहर रोजगार योजना रखा, फिर 1999 में इसका नाम जवाहर रोजगार समृद्धि योजना रखा, 2001 में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना तो 2005 में नरेगा रखा…इन्हें तब गांधी जी याद नहीं आए। 2009 का चुनाव आते-आते कांग्रेस को बापू याद आए और योजना का नाम मनरेगा किया। मनरेगा का नाम पहले पहले महात्मा गांधी के नाम पर नहीं रखा गया। वो तो पहले नरेगा थी। बाद में जब 2009 के चुनाव आए तब चुनाव और वोट के कारण महात्मा गांधी याद आए। बापू याद आए। तब उसमें जोड़ा गया महात्मा गांधी। कांग्रेस पार्टी का “बापू प्रेम” बस दिखावा है और इन्होंने गांधी जी के नाम का इस्तेमाल सिर्फ राजनीति के लिए किया है”