…जौ और गेहूं के पराल से पैरों के लिए तैयार की जाती हैं पूलें अब पांगी घाटी के परंपरागत पहरावे में नज़र आ रहा बदलाव जन उत्सवों के समय पंगवाल पहनते हैं अपना परंपरागत चोला (लिक्खड़), सिर पर...
“मृकुला मंदिर” में कलकत्ते वाली मां काली हुई थीं अवतरित कश्मीरी कन्नौज शैली में बना है माँ मृकुला का मंदिर मंदिर में लकड़ी की दीवारों पर एक ओर महाभारत के दृश्य, दूसरी तरफ रामायण के प्रसंग...
मंदिर में घंटी लगाए जाने के पीछे न सिर्फ धार्मिक कारण,बल्कि वैज्ञानिक कारण भी हिंदू धर्म में देवालयों व मंदिरों के बाहर घंटियां या घडिय़ाल पुरातन काल से लगाए जाते हैं। जैन और हिन्दू मंदिर...
हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक विविधता से भरपूर है। यहां कुल्लू, मण्डी और शिमला जिलों में गर्म पानी के चश्में पाए जाते हैं। यहां गर्म पानी के चश्में नाना प्रकार के औषधीय गुणों से युक्त है। इन...
बृहस्पति की पूजा का विधान गुरुवार को भगवान बृहस्पति की पूजा का विधान है। बृहस्पति या गुरु को बुद्धि और शिक्षा का देवता माना जाता है। गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा करने से धन, विद्या, पुत्र व...
पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल की तृतीया तिथि को हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है। हरियाली तीज का पर्व महिलाओं के सबसे प्रिय पर्वों में से एक है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु...
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में विवाह की रस्म भी विचित्र और अनोखी है। किन्नौर में विवाह को जनतुंग अथवा जनकेंगा कहा जाता है। विवाह पर शराब का सेवन आवश्यक होता है। रिश्ता लडक़े के पिता अथवा मामा...







