सोलन: किसानों को अधिक आय के लिए पुष्प उत्पादन अपनाने के लिए किया प्रोत्साहित
सोलन: किसानों को अधिक आय के लिए पुष्प उत्पादन अपनाने के लिए किया प्रोत्साहित
कट एवं पॉटेड फूलों के व्यावसायिक उत्पादन पर 51 किसानों को दिया प्रशिक्षण
हिमाचल : प्रदेश की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाकर विभिन्न पुष्पीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि किसान अपनी खेती में विविधता लाने के साथ-साथ आय में भी वृद्धि कर सकें।
यह बात डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने सोलन और सिरमौर जिलों के किसानों को संबोधित करते हुए कही। विश्वविद्यालय के पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई)-अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत ‘कट एवं पॉटेड फूल’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नौणी, शमरोड़, दाड़ो देवरिया, कोटला पंजोला पंचायतों के 51 किसानों ने भाग लिया।
प्रो. बवेजा ने स्वरोजगार, आय सृजन और निर्यात के क्षेत्र में पुष्प उत्पादन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने आसपास की पंचायतों के किसानों से व्यावसायिक पुष्प उत्पादन इकाइयां स्थापित करने तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने के लिए विश्वविद्यालय में उपलब्ध तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने पुष्प उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए उन्नत उत्पादन तकनीकों और वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया।
औद्यानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ. मनीष शर्मा ने बागवानी में विविधीकरण के महत्व पर जोर देते हुए किसानों को क्षेत्र के अनुकूल उच्च मूल्य वाली पुष्पीय फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि पुष्प उत्पादन किसानों को उच्च मूल्य एवं बाजारोन्मुख उत्पादन की ओर बढ़ने का अवसर प्रदान करता है तथा इससे उद्यमिता और रोजगार की संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।
इससे पहले, पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बीएस डिल्टा ने किसानों के बीच पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने तथा व्यावसायिक खेती शुरू करने के लिए उन्हें तकनीकी सहयोग प्रदान करने में विभाग के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी जानकारी, उपयुक्त रोपण सामग्री, ग्रोइंग मीडिया तथा पुष्प एवं अन्य बागवानी फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है। डॉ. भारती कश्यप ने प्रतिभागियों को परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग के वैज्ञानिकों ने किसानों को कट, लूज एवं पॉटेड फूलों के उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गुलदाउदी, गुलाब, बर्ड ऑफ पैराडाइज, लिलियम, हाइड्रेंजिया, ग्लेडियोलस और ऑर्किड जैसी प्रमुख कट फ्लावर फसलों की उत्पादन तकनीकों एवं व्यावसायिक संभावनाओं के साथ-साथ गेंदा जैसी लूज फ्लावर फसलों के बारे में जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के पॉटेड पौधों, ग्रोइंग मीडिया एवं उनके प्रबंधन के साथ-साथ घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के लैंडस्केपिंग में फूलदार एवं सजावटी पौधों के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा रोपण सामग्री, ग्रोइंग मीडिया, उत्पादन तकनीकों, विपणन तथा फूलों एवं सजावटी पौधों के बाजार से जुड़ी संभावनाओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय पंचायत परिषद, हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष बलदेव ठाकुर; ग्राम पंचायत शमरोड़ के प्रधान राम गोपाल; ग्राम पंचायत कोटला पंजोला की प्रधान नीमा देवी सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।