किशाऊ परियोजना के सूत्रधार बने CM सुक्खू, हिमाचल के हितों को किया सुरक्षित – सुशांत कपरेट
किशाऊ परियोजना के सूत्रधार बने CM सुक्खू, हिमाचल के हितों को किया सुरक्षित – सुशांत कपरेट
शिमला: दिल्ली में हाल ही में छह राज्यों के बीच किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर हुए एमओयू के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।भाजपा जहा मुख्यमंत्री को इसका श्रेय न लेने की नसीहत दे रहे है वही हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता सुशांत कपरेट ने इस समझौते को हिमाचल प्रदेश की बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को इसका प्रमुख सूत्रधार करार दिया है।
सुशांत कपरेट ने कहा कि 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के दृढ़ संकल्प और प्रदेश के हितों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण ही यह समझौता संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पास जल, वन और प्राकृतिक संसाधनों के रूप में जो अमूल्य संपदा है, उसकी सुरक्षा और उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने लगातार प्रयास किए हैं।
कपरेट ने कहा कि लगभग 15,624 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से पांच राज्यों को लाभ मिलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह सुनिश्चित किया कि हिमाचल प्रदेश के हितों से किसी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कहा कि परियोजना में प्रदेश के अधिकारों और आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए जो एमओयू हस्ताक्षरित हुआ है, वह राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल के हितों की लड़ाई आगे भी इसी मजबूती से लड़ी जानी चाहिए।
उन्होंने विपक्ष द्वारा परियोजना को लेकर की जा रही राजनीति पर भी निशाना साधा। कपरेट ने कहा कि आज भाजपा इस पर सवाल उठा रही है । भाजपा नेताओं को बताना चाहिए कि जब आपकी सरकार थी उस समय इसको लेकर कदम क्यो नही उठाएं।उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना की पहली डीपीआर वर्ष 1985 में तैयार हुई थी, लेकिन चार दशक बाद 2026 में जाकर इसका एमओयू साइन हो पाया है। इससे स्पष्ट है कि लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने में वर्तमान सरकार ने निर्णायक भूमिका निभाई है।
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही दिल्ली सहित अन्य लाभार्थी राज्यों को पेयजल और बिजली उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि परियोजना से बनने वाला पावर ग्रिड उत्तरी भारत के उन राज्यों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा, जहां ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है।
कपरेट ने कहा कि चूंकि जल स्रोत हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं, इसलिए प्रदेश को इससे उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए और मुख्यमंत्री ने इसी दिशा में मजबूती से पैरवी की है। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे और राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए वाइल्ड फ्लावर हॉल का उदाहरण भी दिया। कपरेट ने कहा कि जिस प्रकार मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रदेश की संपत्तियों और अधिकारों को वापस हासिल करने के लिए संघर्ष किया, उसी प्रकार किशाऊ परियोजना में भी हिमाचल के हितों की रक्षा सुनिश्चित की है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कपरेट ने कहा कि प्रदेश को मिलने वाली आरडीजी (RDG) अनुदान राशि बंद किए जाने और जीएसटी हिस्सेदारी में कमी जैसे मुद्दों के कारण हिमाचल वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों से उत्पन्न चुनौतियों का दोष राज्य सरकार पर मढ़ना तर्कसंगत नहीं है।
कपरेट ने कहा कि किशाऊ परियोजना केवल एक जलविद्युत परियोजना नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के आर्थिक भविष्य, रोजगार सृजन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलेगा।