युवाओं को रोजगार देने का वादा करने वाली सुक्खू सरकार आउटसोर्स के सहारे चला रही भर्ती व्यवस्था – बिक्रम ठाकुर

शिमला: विधानसभा में नियम 130 के अंतर्गत रोजगार एवं बेरोजगारी के विषय पर हुई चर्चा के दौरान पूर्व उद्योग मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, घटती नियमित भर्तियों, उद्योगों के कमजोर होते वातावरण और युवाओं के भविष्य को लेकर जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले युवाओं से पांच वर्षों में पांच लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन आज सरकार की वास्तविकता यह है कि नियमित रोजगार देने के बजाय आउटसोर्स और अल्प वेतन वाली नौकरियों को रोजगार की उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपाई जा रही है।बिक्रम ठाकुर ने कहा कि लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़े प्रदेश की चिंताजनक तस्वीर सामने रखते हैं। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी दर 4.5 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 3.01 प्रतिशत है। यानी हिमाचल की बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से लगभग 60 प्रतिशत अधिक है। महिला बेरोजगारी भी हिमाचल में राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। शहरी महिलाओं में बेरोजगारी की स्थिति और भी चिंताजनक है।उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि हिमाचल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती युवा बेरोजगारी की है। लगभग हर पांचवां युवा जो रोजगार बाजार में प्रवेश कर रहा है, वह बेरोजगार है। ऐसे समय में सरकार को रोजगार के नए अवसर पैदा करने चाहिए थे, लेकिन सरकार की नीतियां इसके विपरीत दिशा में जा रही हैं।बिक्रम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि हर बेरोजगार युवा को सरकारी नौकरी दी जा सके। प्रदेश की देनदारियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकार को केंद्र की तर्ज पर पारदर्शी और नियमित भर्तियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। लेकिन प्रदेश सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं कर रही है।

एमएसएमई और उद्योगों के आंकड़े गिनाने से रोजगार नहीं मिलेगा: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार हिमाचल में लगभग 95 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयां एमएसएमई क्षेत्र से जुड़ी हैं। प्रदेश में 600 से अधिक फार्मास्यूटिकल इकाइयां हैं और फार्मा क्षेत्र का प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। सैकड़ों औद्योगिक परियोजनाओं को निवेश के साथ स्वीकृति मिलने की बात सरकार करती है। उन्होंने सवाल किया कि सिर्फ करोड़ों रुपये के निवेश के आंकड़े बताने से क्या होगा, यदि हिमाचल के बेरोजगार युवा को इन उद्योगों में रोजगार ही नहीं मिल रहा?

उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि जिन परियोजनाओं और एमएसएमई का वह आंकड़ा देती है, उनसे कितने हिमाचली युवाओं को वास्तविक रोजगार मिला है। उद्योग तभी टिकेंगे जब उन्हें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, नीति और अनुकूल वातावरण मिलेगा। बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में उद्योग बंद हो रहे हैं, निवेश प्रभावित हो रहा है और औद्योगिक इकाइयां अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग बंद होंगे तो रोजगार कहां से आएगा? मुख्यमंत्री को उद्योगों के विषय को केवल भ्रष्टाचार के आरोपों तक सीमित करने के बजाय यह सोचना चाहिए कि प्रदेश में उद्योग कैसे आएं और टिकें।

सरकार के अपने जवाब में 115 औद्योगिक इकाइयों के बंद होने की बात: बिक्रम ठाकुर ने विधानसभा में सरकार के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि 26 अगस्त 2025 को पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया था कि प्रदेश में लगभग 115 औद्योगिक इकाइयां बंद हुई हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि उद्योग बंद हो रहे हैं तो सरकार रोजगार के नए अवसर कैसे पैदा करेगी? उन्होंने कहा कि सरकार को उद्योगों को यह स्पष्ट करना होगा कि हिमाचल उन्हें क्या सुविधाएं देगा, ताकि वे यहां निवेश करें और युवाओं को रोजगार दें। लेकिन पिछले साढ़े तीन वर्षों में ऐसा भरोसेमंद औद्योगिक वातावरण बनाने में सरकार विफल रही है।

पांच लाख नौकरियों का वादा, लेकिन ₹4-10 हजार की नौकरी: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए पांच वर्षों में पांच लाख नौकरियों का वादा किया था। यहां तक कि सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने पेंशन वाली नौकरियों के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि वन विभाग में वन मित्र को करीब ₹12 हजार, पशुपालन विभाग में पशु मित्र को लगभग ₹5 हजार, जल वाहक को करीब ₹6 हजार और बिजली मित्र जैसी योजनाओं में करीब ₹10 हजार मानदेय की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्या ₹4 हजार, ₹6 हजार या ₹10 हजार की नौकरी देकर सरकार अपनी पीठ थपथपाएगी? हिमाचल का युवा पढ़ा-लिखा है, उसके पास डिग्री और योग्यता है। उसे सम्मानजनक और स्थायी रोजगार चाहिए, न कि ऐसी अस्थायी व्यवस्था जिसमें भविष्य की कोई सुरक्षा नहीं है।

नियमित भर्तियां कम, आउटसोर्स भर्ती ज्यादा: बिक्रम ठाकुर ने विधानसभा में सरकार के जवाब का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से 725 लोगों की भर्ती हुई है, जबकि राज्य चयन बोर्ड के माध्यम से केवल 97 लोगों की भर्ती हुई। इसके अलावा बड़ी संख्या में भर्ती आउटसोर्स के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है कि जो युवा प्रतियोगी परीक्षा पास कर सरकारी सेवा में जाने की उम्मीद करता है, उसे भी अंततः आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नौकरी लेने के लिए मजबूर किया जाए। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए।

पेपर लीक पर सरकार को घेरा: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से सबसे ज्यादा नुकसान उस युवा को होता है जिसने वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की होती है। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में अपनी पारदर्शिता का दावा करती है, लेकिन भर्ती से जुड़े मामलों में गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं। उन्होंने एक जांच संबंधी पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी द्वारा गंभीर टिप्पणियां की गई थीं। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि जांच में जिम्मेदारी तय की गई है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि सरकार को पारदर्शिता के दावे से आगे बढ़कर वास्तविक कार्रवाई करनी चाहिए।

414 टीजीटी आर्ट्स अभ्यर्थियों को नियुक्ति कब?: बिक्रम ठाकुर ने शिक्षा मंत्री से विशेष रूप से मांग की कि टीजीटी आर्ट्स के 414 अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और 75 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने परीक्षा पास की है, अपनी योग्यता साबित की है और अब उन्हें नियुक्ति के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन 414 अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।

मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना को किया खत्म: बिक्रम ठाकुर ने उद्योग मंत्री को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार के समय मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना और उन्हें रोजगार देने वाला बनाना था। भाजपा के समय इस योजना के तहत हजारों इकाइयां स्थापित हुईं और बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इस योजना की स्थिति बेहद खराब हो गई है। जिन युवाओं ने योजना के भरोसे अपनी पूंजी लगाई और आवेदन किए, वे आज परेशान हैं और कई लोग सरकार के खिलाफ न्यायालय तक जाने को मजबूर हैं।

व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रदेश को आउटसोर्स व्यवस्था में धकेला: बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सरकार बार-बार व्यवस्था परिवर्तन की बात करती है, लेकिन प्रदेश में जो व्यवस्था परिवर्तन दिखाई दे रहा है वह नियमित रोजगार से आउटसोर्स रोजगार की ओर जाने का है। लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवाओं में नियमित भर्ती कम हो रही है, जबकि आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से नियुक्तियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल का युवा आज रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर है। यह सरकार की रोजगार नीति की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

भर्ती और ट्रांसफर में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की जांच हो: बिक्रम ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि शहीद परिवार से जुड़े एक कर्मचारी को बार-बार दूर स्थान पर भेजे जाने का मामला उनके सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर और एडजस्टमेंट के नाम पर राजनीतिक दबाव और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं तो उनकी जांच करवाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी किसी की राजनीतिक पहुंच या पैसे के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और नियमों के आधार पर मिलनी चाहिए।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आज प्रदेश का नौजवान परेशान है। किसानों, महिलाओं और युवाओं से किए गए वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार को अभी भी समय रहते अपनी रोजगार नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए, नियमित भर्तियों को गति देनी चाहिए, उद्योगों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण देना चाहिए तथा युवाओं को स्थायी एवं सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध करवाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले युवाओं से बड़े-बड़े वादे किए थे। अब उन वादों का हिसाब देने का समय है। हिमाचल का युवा केवल आश्वासन नहीं, रोजगार चाहता है और सुक्खू सरकार को इसका जवाब देना होगा।

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