शिमला में पेंशनरों का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल…

हिमाचल: हिमाचल प्रदेश भर से शिमला के चौड़ा मैदान पहुंचे पेंशनरों ने मंगलवार को अपनी लंबित वित्तीय देनदारियों और विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित राज्यस्तरीय धरने में बड़ी संख्या में पेंशनरों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने लंबित डीए/डीआर एरियर, संशोधित वेतनमान के बकाये और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित बिलों का जल्द भुगतान करने की मांग उठाई।

​ संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि जिन बुजुर्गों ने अपनी जिंदगी प्रदेश की सेवा और निर्माण में लगा दी, आज उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। समिति ने कहना है कि यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री के बयानों और वादों पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया कि 13 मई को सचिवालय में हुई। बैठक में 31 जुलाई से पहले 40 प्रतिशत अदायगी (ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, लीव एनकैशमेंट और एरियर) देने का जो वादा किया गया था, उसे पूरा नहीं किया गया और अगस्त में नोटिफिकेशन निकालकर इसे ग्रेडेशन में बांट दिया गया।  उन्होंने चेतावनी दी कि पेंशनर्स अपने अधिकार और अपनी कमाई का हक मांगने आए हैं, भीख मांगने नहीं, और सरकार द्वारा उनके साथ खेली जा रही राजनीतिक चालों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। समिति के अनुसार प्रदेश में करीब 1.90 लाख से अधिक पेंशनर हैं और करीब 7,000 करोड़ रुपये की देनदारी अभी भी लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर सरकार विभिन्न मदों में खर्च कर रही है, जबकि पेंशनरों को वर्षों से अपने बकाये के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एरियर और अन्य देनदारियों के भुगतान में देरी के कारण कई पेंशनरों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने एचआरटीसी और बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की लंबित मांगों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार को कर्मचारी व पेंशनर वर्ग की समस्याओं का जल्द समाधान करना चाहिए।

सुरेश ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार का रवैया नहीं बदला तो पेंशनर्स आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक के बाद आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी और जरूरत पड़ी तो शिमला में भी आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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