रोबोटिक सर्जरी के सपने दिखाने से पहले अस्पतालों में दवा, डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध कराए सरकार – राकेश जमवाल
रोबोटिक सर्जरी के सपने दिखाने से पहले अस्पतालों में दवा, डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध कराए सरकार – राकेश जमवाल
हिमाचल: प्रदेश विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक एवं मुख्य प्रवक्ता राकेश जामवाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनों और रोबोटिक सर्जरी की बातें कर रही है, लेकिन प्रदेश के अस्पतालों में आम गरीब मरीज को आज भी दवा, डॉक्टर, विशेषज्ञ चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।राकेश जामवाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक का भाजपा विरोध नहीं करती, लेकिन सरकार को यह प्राथमिकता तय करनी होगी कि रोबोटिक सर्जरी से पहले अस्पतालों में सामान्य सर्जरी, दवाइयां और डॉक्टर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि सरकार को विज्ञापनों और घोषणाओं की चमक से बाहर निकलकर अस्पतालों की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने नेरचौक मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि यह संस्थान मंडी ही नहीं बल्कि कुल्लू, लाहौल-स्पीति और आसपास के बड़े क्षेत्र की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे महत्वपूर्ण मेडिकल कॉलेज में यदि रेडियोलॉजी सहित अन्य विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टाफ की कमी है तो सरकार को पहले उसे दूर करना चाहिए।
रोबोटिक सर्जरी अच्छी, लेकिन गरीब मरीज के इलाज की कीमत कौन देगा?
राकेश जामवाल ने सदन में एक मरीज का उदाहरण देते हुए कहा कि ब्लैडर स्टोन के इलाज के लिए एक परिवार से करीब 30 हजार रुपये मांगे गए। बाद में परिवार को पता चला कि मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। परिवार ने रोबोटिक सर्जरी नहीं करवाने का निर्णय लिया और सामान्य प्रक्रिया से मरीज का ऑपरेशन करीब 5 हजार रुपये में हो गया।उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि अत्याधुनिक तकनीक अपनी जगह उपयोगी है, लेकिन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सामान्य इलाज की सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि मरीज के पास महंगे इलाज का खर्च उठाने की क्षमता ही नहीं है तो केवल अत्याधुनिक मशीनें खरीदने से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत कैसे होगी?
नेरचौक में मशीनें हैं तो विशेषज्ञ डॉक्टर और रेडियोलॉजी स्टाफ क्यों नहीं?
भाजपा विधायक ने कहा कि एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये की मशीनें खरीदने की घोषणाएं कर रही है, दूसरी तरफ अस्पतालों में उन्हें संचालित करने के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि मशीन खरीदना आसान है, लेकिन उसे 24 घंटे प्रभावी ढंग से चलाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ की आवश्यकता होती है।उन्होंने सरकार से मांग की कि नेरचौक मेडिकल कॉलेज में सभी आवश्यक विभागों में पर्याप्त चिकित्सकों और कर्मचारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि मंडी के साथ-साथ दूरदराज के जिलों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल सके।
कोरोना योद्धाओं को बाहर का रास्ता दिखाना सरकार की संवेदनहीनता
राकेश जामवाल ने कोविड काल में सेवाएं देने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कठिन समय में सफाई कर्मचारी, स्टाफ नर्स, ड्राइवर और अन्य कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा में जुटे रहे।उन्होंने सवाल किया कि जिन कर्मचारियों ने संकट के समय सरकार और प्रदेश की जनता का साथ दिया, उनका आखिर क्या कसूर था कि बाद में उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया?उन्होंने सरकार से मांग की कि कोविड काल में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के योगदान को देखते हुए उनके भविष्य पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए।
डेढ़ करोड़ का ऑक्सीजन प्लांट बंद, सिलेंडर खरीदने पर सरकार क्यों मजबूर?
राकेश जामवाल ने अपने विधानसभा क्षेत्र में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से स्थापित ऑक्सीजन प्लांट के बंद होने का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्लांट को संचालित करने के लिए आउटसोर्स पर तैनात दो कर्मचारियों को हटा दिया गया और उसके बाद प्लांट बंद पड़ा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार के पास पहले से ऑक्सीजन उत्पादन की सुविधा मौजूद है तो उसे बंद रखकर दूसरी ओर ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने का क्या औचित्य है? उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि प्लांट को तत्काल दोबारा शुरू किया जाए। इससे मरीजों को सुविधा मिलेगी और सरकार के खर्च में भी कमी आएगी।
डायलिसिस जैसी जीवनरक्षक सुविधा को भुगतान के अभाव में बाधित नहीं होने देंगे
विधायक ने पीपीपी मोड पर चल रहे डायलिसिस सेंटर का मामला उठाते हुए कहा कि संबंधित संस्था को समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण डायलिसिस सेवा जारी रखना मुश्किल बताया गया है। उन्होंने कहा कि डायलिसिस पर निर्भर गरीब मरीजों के लिए ऐसी स्थिति बेहद गंभीर है।उन्होंने सरकार से मांग की कि भुगतान से जुड़े सभी मामलों का तत्काल समाधान किया जाए ताकि किसी मरीज की डायलिसिस सुविधा बाधित न हो।उन्होंने मंडी जिले के एक निजी अस्पताल में स्टेंटिंग की सुविधा का उल्लेख करते हुए वहां आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी योजनाओं का लाभ पात्र मरीजों को न मिलने के मामले की भी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी के कारण मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर होते हैं, इसलिए पात्र मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ हर हाल में मिलना चाहिए।
दुर्गम क्षेत्रों की पीएचसी बंद कर सरकार किस विकास का दावा कर रही है?
राकेश जामवाल ने अपने विधानसभा क्षेत्र में बंद की गई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पंदली और पौड़ा कोठी की पीएचसी बंद होने से दुर्गम क्षेत्रों की जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में लोगों को प्राथमिक उपचार तक के लिए 50 से 55 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन दोनों पीएचसी की स्थिति की समीक्षा कर इन्हें तत्काल दोबारा शुरू किया जाए।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा का असली मूल्यांकन राजधानी के बड़े अस्पतालों से नहीं, बल्कि उस ग्रामीण और दुर्गम परिवार से होना चाहिए जिसे रात के समय अपने मरीज को लेकर कई किलोमीटर सफर करना पड़ता है।
अधूरे अस्पताल भवनों पर सरकार की चुप्पी क्यों?
विधायक ने अपने क्षेत्र में निर्माणाधीन स्वास्थ्य संस्थान के अधूरे भवन का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि अस्पताल भवन का निर्माण कार्य बंद होने से करोड़ों रुपये का निवेश बेकार पड़ा है और क्षेत्र की जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।उन्होंने सरकार से मांग की कि अधूरे भवनों का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए तथा वहां डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त तैनाती की जाए।राकेश जामवाल ने कहा कि प्रदेश की जनता को घोषणाएं नहीं, जमीन पर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार रोबोटिक सर्जरी, अत्याधुनिक मशीनों और बड़े-बड़े दावों की बात करने से पहले यह सुनिश्चित करे कि किसी गरीब मरीज को साधारण बीमारी के इलाज के लिए दवा, डॉक्टर और अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने कहा कि “रोबोटिक सर्जरी का स्वागत है, लेकिन हिमाचल के गरीब मरीज को पहले दवा चाहिए, डॉक्टर चाहिए, ऑक्सीजन चाहिए, डायलिसिस चाहिए और नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चाहिए। सरकार की प्राथमिकता वीआईपी स्वास्थ्य मॉडल नहीं, बल्कि आम आदमी का स्वास्थ्य होना चाहिए।”