कृषि उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए वाइन मेकिंग का व्यावसायिक पाठ्यक्रम किया शुरू; नौणी विवि के तीन माह के पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया हुई शुरू
कृषि उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए वाइन मेकिंग का व्यावसायिक पाठ्यक्रम किया शुरू; नौणी विवि के तीन माह के पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया हुई शुरू
सोलन: खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ), नौणी ने तीन माह के वाइन मेकिंग व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इच्छुक उद्यमियों, फल उत्पादकों तथा ग्रामीण युवाओं को हिमाचल प्रदेश में उपलब्ध प्रचुर फल संसाधनों पर आधारित मूल्य संवर्धित उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक तकनीकी दक्षता प्रदान करना है।
वाइन टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम को वैज्ञानिक वाइन उत्पादन की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कक्षा शिक्षण एवं प्रयोगशाला प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को फलों के चयन, रस निष्कर्षण, किण्वन (फर्मेंटेशन), यीस्ट कल्चर प्रबंधन, स्पष्टीकरण (क्लैरिफिकेशन), फिल्ट्रेशन, परिपक्वता (मैच्युरेशन), ब्लेंडिंग, बॉटलिंग, पाश्चुरीकरण तथा गुणवत्ता मूल्यांकन सहित वाइन निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में उच्च गुणवत्ता वाली वाइन तैयार करने के लिए आवश्यक भौतिक-रासायनिक तथा सूक्ष्म जीव विज्ञान संबंधी पहलुओं को भी शामिल किया गया है। पाठ्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य उद्यमिता विकास तथा व्यावसायिक वाइनरी प्रबंधन को बढ़ावा देना है। प्रतिभागियों को गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP), गुड हाइजीन प्रैक्टिसेज (GHP) तथा गुणवत्ता आश्वासन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही लघु एवं मध्यम स्तर की वाइनरी स्थापित करने और संचालित करने संबंधी व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण में अवसंरचना नियोजन, उपकरणों का चयन, गुणवत्ता नियंत्रण, भंडारण, पैकेजिंग, लेबलिंग तथा स्वच्छता प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं, जिससे प्रतिभागी सफल वाइन निर्माण उद्यम स्थापित करने के साथ-साथ बागवानी उत्पादों के मूल्य संवर्धन में भी योगदान दे सकें।
कुलपतिप्रो. एच.एस. बवेजाने कहा कि बागवानी उत्पादों का मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने तथा पर्वतीय क्षेत्रों में सतत आजीविका सृजन का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि हिमाचल गुणवत्तापूर्ण फलों की समृद्ध विविधता से संपन्न है, लेकिन विपणन संबंधी चुनौतियों और कटाई उपरांत होने वाले नुकसान के कारण उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होता है। वैज्ञानिक प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन इन चुनौतियों को आर्थिक अवसरों में बदल सकते हैं। इस व्यावसायिक पाठ्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय ऐसे कुशल उद्यमी तैयार करना चाहता है, जो स्थानीय फलों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित कर स्वयं तथा अन्य लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करें और राज्य के कृषि-प्रसंस्करण तंत्र को सुदृढ़ बनाने में योगदान दें पाठ्यक्रम में 10 सीटें उपलब्ध हैं। प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 या समकक्ष परीक्षा में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक है। प्रवेश प्रक्रिया में स्नातक एवं स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। पाठ्यक्रम की फीस ₹18,000 निर्धारित की गई है। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 8 अगस्त, 2026 है, जबकि काउंसलिंग 14 अगस्त, 2026 को आयोजित होगी। पाठ्यक्रम 20 अगस्त, 2026 से प्रारंभ होगा। आवेदन पत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन पत्र के साथ दसवीं कक्षा का प्रमाण-पत्र, शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतियां, अंतिम शिक्षण संस्थान के हेड /राजपत्रित अधिकारी अथवा संबंधित ग्राम पंचायत प्रधान द्वारा जारी चरित्र प्रमाण-पत्र तथा ₹100 का डिमांड ड्राफ्ट/आईपीओ हेड, डिपार्टमेंट ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पक्ष में संलग्न कर पंजीकृत डाक अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम से हेड, डिपार्टमेंट ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर, डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, जिला सोलन (हि.प्र.)–173230 के पते पर भेजा जा सकता है। कूरियर के माध्यम से भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन पत्र विभाग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से भी जमा कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए डिपार्टमेंट ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी से 01792-252410 अथवा hodfst@uhf.ac.in पर संपर्क किया जा सकता है।