प्रदेश व राष्ट्रीय मुद्दा (Page 2)

क्यों जल उठी “दिल्ली”? बरसों साथ रहते “इंसान” अचानक बन गए “हिंदू-मुसलमान” 

…क्यों दहक उठी “दिल्ली” ? दिल्ली की हिंसा अचानक तो नहीं हुई…! सवाल..! आखिर बसे बसाये शहर को उजाड़ने वाले दंगाई कौन थे? किसकी साजिश थी? दिल्ली में नागरिकता संशोधन एक्ट के नाम पर हुई हिंसा की...

एक तरफ महिला सशक्तिकरण तो दूसरी ओर महिलाओं पर देश की लचर कानून व्यवस्था भारी

एक तरफ महिला सशक्तिकरण तो दूसरी ओर महिलाओं पर देश की लचर कानून व्यवस्था भारी

…आज जो हुआ है वह मिसाल, ऐसे अपराधियों का अंजाम यही होना चाहिए आम आदमी की सुरक्षा का जिम्मा हर पुलिस की नैतिक जिम्मेदारी इस प्रकार के मामलों में हर राज्य की पुलिस को तेलंगाना पुलिस से सीख लेने...

क्या देश की लचर कानून व्यवस्था के चलते बेटियां सुरिक्षत नहीं...?

क्या देश की लचर कानून व्यवस्था के चलते बेटियां सुरिक्षत नहीं…?

क्या देश की लचर कानून व्यवस्था के चलते बेटियां सुरिक्षत नहीं…? हमारे देश की कानून व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर क्यों नहीं है? इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देने वालों के लिए...

कौन सुनेगा किसको सुनाएं इसलिए.....आवाज उठाएं सबको बताएं!

“आम आदमी”….!!

ये समस्याएं आज नहीं पनपी वर्षों पुरानी हैं…. अपने घरों की नींव तो मजबूत कर ली परन्तु कुछ आम आदमी के कच्चे घरों को ढहा दिया …जो ईमानदार, नेक, निर्भीक, और बेदाग छवि का नेता व अधिकारी होगा वो आपकी...

लौट आओ प्यारी गौरैया....गौरैया का लुप्त होना चिन्ता का विषय

हमारे घर-आंगन में आती वो “चिड़ियाँ”, चीं-चीं कर घर-आंगन को महकाती थी वो “चिड़ियाँ”

गौरैया का लुप्त होना चिन्ता का विषय आधुनिक युग में रहन-सहन और वातावरण में आए बदलावों के कारण आज गौरैया पर मंडरा रहे हैं कई ख़तरे मनुष्य की बदलती जीवन शैली ने गौरैया के आवास, भोजन व घोंसलें,...

"पलायन" खेत बंजर, घर खंडहर....!!

“पलायन” खेत बंजर, घर खंडहर….!!

यूं ही सब पलायन करते रहे तो…खेत हो जाएंगे बंजर…घर बन जाएंगे खंडहर गांव से शहरों का रूख, शहरों से अन्य राज्यों, राज्यों से देश-विदेशों की ओर पलायन गांव के लोगों का रूख अब शहरों की ओर होने लगा...

child labour

अभाव में पलता… “बचपन”

जीवन का यह एक कटु सत्य है कि मासूम बच्चों का जीवन कहीं तो खुशियो से भरपूर है। तो कहीं खुशियों से महरूम। बच्चों के हाथों में कलम और आंखो में भविष्य के सपने होने चाहिए। लेकिन दुनिया में करोड़ों...